ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने एक्वायर जमीन में फर्जी तरीके से अमरूदों के बाग दिखाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में अब विजिलेंस ब्यूरो ने खरड़ की बागवानी विकास अधिकारी वैशाली को गिरफ्तार किया है। उनकी गलत रिपोर्ट पर करीब 145 करोड़ मुआवजा जारी किया गया था। केस दर्ज होने के बाद से वह फरार थी जबकि जिला अदालत से उनकी जमानत भी खारिज हो चुकी थी। वहीं पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लंबित है। इस मामले में यह 17वीं गिरफ्तारी है। विजिलेंस इस मामले में विभाग के अन्य अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
गमाडा ने एयरपोर्ट रोड पर एरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। अधिगृहीत जमीन का मुआवजा गमाडा ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के मुताबिक दिया था। उक्त जमीन में लगे अमरूद के वृक्षों की कीमत जमीन से अलग तौर पर अदा की जानी थी। फलदार वृक्षों की कीमत बागवानी विभाग की तरफ से निर्धारित की जानी थी। इसके बाद जमीन अधिग्रहण कलेक्टर (एलएसी) गमाडा ने फलदार वृक्षों वाली जमीन की एक सर्वेक्षण सूची डायरेक्टर बागवानी को भेज कर वृक्षों का मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करने को कहा था।
सबसे पहले पॉकेट- ए गांव बाकरपुर के पेड़ों के मूल्यांकन का काम डिप्टी डायरेक्टर मोहाली की तरफ से जसप्रीत सिंह सिद्धू, एचडीओ डेराबस्सी को सौंपा गया। यह क्षेत्र एचडीओ खरड़ वैशाली के अधिकार क्षेत्र में आता था। जसप्रीत सिद्धू ने अपनी रिपोर्ट में श्रेणी 1 और 2 के 2500 पौधे प्रति एकड़ के हिसाब से दिखाए। इस अनुसार भुगतान करने के लिए यह रिपोर्ट एलएसी गमाडा को भेजी गई। फिर जमीन के कुछ मालिकों ने आवेदन दायर किया कि उनके पौधों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया। उन्होंने अधिक मुआवजे के लिए दावा दायर किया।
इन आवेदनों के आधार पर डायरेक्टर बागवानी ने इस रिपोर्ट की तस्दीक के लिए राज्यस्तरीय कमेटी का गठन किया। कमेटी में दो सहायक डायरेक्टर और दो एचडीओ को शामिल किया गया। इस कमेटी ने पौधों की स्थिति और उपज के हिसाब के साथ फिर मूल्यांकन करने का सुझाव दिया। इसके बाद पॉकेट-ए के मूल्यांकन का काम एचडीओ खरड़ वैशाली को दिया गया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट पेश की जो लगभग पहली रिपोर्ट के साथ ही मिलती-जुलती थी, जिसमें ज्यादातर पौधों को फल देने के लिए तैयार (4-5 साल की उम्र) होने के रूप में दर्शाया गया जिससे लाभार्थियों को अधिकतम मुआवजा दिया जा सके।