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कोकीन मतलब मौत, चौंकाने वाला खुलासा

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आमतौर पर माना जाता है कि कोकीन अमीरों का नशा है और पश्चिमी देशों में इसकी डिमांड ज्यादा है। कोकीन का नशा काफी महंगा और सामान्य ड्रग्स एब्यूज इससे दूर रहते हैं, लेकिन पीजीआई के डी-एडिक्शन सेंटर ने इस तथ्य को ही पूरी तरह से पलटकर रख दिया है।
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हाल ही में डी-एडिक्शन सेंटर में पांच ऐसे युवा दाखिल हुए, जिन्हें कोकीन की लत लग गई थी। इन युवाओं की उम्र मात्र 20-27 साल थी। खास बात यह है कि अधिकतर युवा मध्य आय वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।

कोकीन की लत पड़ने के बाद इन युवाओं के कैरियर खत्म हो गए। जो नौकरी कर रहे थे उनकी नौकरी छूट गई, जो पढ़ाई कर रहे थे, उनकी पढ़ाई छूट गई।

कोकीन ‌रिलैप्स के लिए कोई दवा नहीं

कोकीन का नशा वे सूंघ कर करते थे। विशेषज्ञ बताते हैं कि पश्चिमी देशों में कोकीन से सोशल क्राइम, रोड एक्सीडेंट और संक्रमणित रोगों की तदाद बढ़ी है।

पीजीआई के मनोचिकित्सक विभाग के प्रोफेसर डी बसु का मानना है कि अब महंगा नशा भी आम युवाओं में पैंठ बना रहा है। उससे बड़ी बात यह है कि कोकीन रिलैप्स के लिए अब तक कोई दवा स्वीकृत नहीं की गई है।

डी-एडिक्शन सेंटर में लत छुड़ाने के लिए काउंसिलिंग का प्रयोग किया गया, जिसका काफी पाजीटिव असर भी देखने को मिला। सेंटर में दाखिल सभी मरीजों को फिलहाल ठीक कर दिया गया है। अब उनका फालोअप चल रहा है।

पढ़िए नशे के मरीजों का प्रोफाइल

पहला मरीज : पहले सिगरेट, फिर कोकीन की लत
26 वर्षीय युवक ने 16 साल की उम्र में सिगरेट पीना शुरू कर दी थी। 20 साल तक की उम्र में आते-आते उसने नशे के लिए कफ सीरप व अन्य दवाएं यूज करने लगा। डी-एडिक्शन सेंटर में आने से छह महीने पहले उसके कुछ दोस्तों ने उसे कोकीन आफर किया। एक डोज लेने के बाद युवक को काफी सुखद अनुभूति हुई और उसने रोजाना डोज लेना शुरू कर दी। कोकीन खरीदने में काफी रुपया खर्च होता था। बाद में वह डी-एडिक्शन सेंटर में दाखिल हो गया है।

दूसरा मरीज : गर्ल फ्रेंड से ब्रेकअप, शुरू कर दी कोकीन
27 वर्षीय युवक पिता के साथ इलेक्ट्रॉनिक शॉप में काम करता था। 17 साल की उम्र में पहले सिगरेट और फिर हेरोइन व कोकीन की लत पड़ गई। परिजनों उसे एडमिट कराया तो वह ठीक हो गया। कुछ दिन तक उसने कोकीन नहीं ली। जब उसकी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हुआ तो उसने फिर से कोकीन का नशा शुरू कर दिया। इससे उसके शरीर में अजीबों-गरीब लक्षण दिखने लगे। बाद में उसे पीजीआई के डी-एडिक्शन सेंटर में दाखिल कराया गया। फिलहाल अब वह ठीक है।
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कोकीन की लत का पता लगाना मुश्किल

पीजीआई के मुताबिक यदि कोई कोकीन लेता है तो उसका पता लगा पाना काफी मुश्किल होता है।

इसका पता लगाने के लिए यूरीन और प्लाज्मा की स्क्रीनिंग की जाती है, लेकिन इसकी सुविधा बहुत कम जगह ही उपलब्ध है। डी-एडिक्शन सेंटर में पेशेंट अपनी मर्जी से आया और उसने बताया कि वह कोकीन का लती है।

इससे एक बात यह भी साफ होती है कि कोकीन का नशा नहीं मिलने पर उन्हें काफी परेशानी आ रही होगी। हालांकि, कुछ पेशेंट में दोबारा से कोकीन लेने की लत के लक्षण भी देखने को मिले।
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