हरियाणा के शहद उत्पादकों को कोरोना काल में बड़ा झटका लगा है। विश्व के कोरोना की चपेट में आने से अमेरिका, कनाडा व यूरोप के देशों में सरसों के शहद का निर्यात रुक गया है। प्रदेश में उत्पादित सरसों का शहद विदेशियों का सबसे पसंदीदा है। हर साल मार्च से जून तक देश से 50 हजार क्विंटल इस शहद का विदेशों में निर्यात होता है। इस बार ट्रेडर्स शहद को उठा ही नहीं रहे।
उत्पादन के कुल मात्रा में से इसकी 90 से 95 फीसदी खपत विदेशों में ही होती है। सूबे में इसे 5 से 10 प्रतिशत के बीच ही उपयोग में लाया जाता है। एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र कुरुक्षेत्र के उप निदेशक बिल्लू यादव ने बताया कि इस बार सरसों के शहद की विदेशों में मार्केटिंग नहीं हो पाई। विदेशों में निर्यात होने वाले शहद से उत्पादकों को अच्छी कमाई हो जाती है।
अभी तक कोई ट्रेडर्स आगे नहीं आया है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। राज्य वार कितना बजट आता है, उसे लेकर केंद्र सरकार से अभी पत्राचार नहीं हुआ है। राशि मिलने व गाइडलाइन जारी होने पर मधुमक्खी पालकों को प्रोत्साहन पैकेज देंगे। सरसों का शहद 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निकलता है।
भारत में सबसे ज्यादा सरसों के शहद का ही उत्पादन होता है। इसमें ग्लूकोज और फ्रुक्टोज की मात्रा ज्यादा होने के कारण यह जम जाता है जिससे इसको क्रीम भी कहा जाता है।