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कोरोनाः हरियाणा के शहद उत्पादकों को लगा झटका, अमेरिका-यूरोप और कनाडा में निर्यात रुका

Fri, 05 Jun 2020 01:27 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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हरियाणा के शहद उत्पादकों को कोरोना काल में बड़ा झटका लगा है। विश्व के कोरोना की चपेट में आने से अमेरिका, कनाडा व यूरोप के देशों में सरसों के शहद का निर्यात रुक गया है। प्रदेश में उत्पादित सरसों का शहद विदेशियों का सबसे पसंदीदा है। हर साल मार्च से जून तक देश से 50 हजार क्विंटल इस शहद का विदेशों में निर्यात होता है। इस बार ट्रेडर्स शहद को उठा ही नहीं रहे।
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उत्पादन के कुल मात्रा में से इसकी 90 से 95 फीसदी खपत विदेशों में ही होती है। सूबे में इसे 5 से 10 प्रतिशत के बीच ही उपयोग में लाया जाता है। एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र कुरुक्षेत्र के उप निदेशक बिल्लू यादव ने बताया कि इस बार सरसों के शहद की विदेशों में मार्केटिंग नहीं हो पाई। विदेशों में निर्यात होने वाले शहद से उत्पादकों को अच्छी कमाई हो जाती है।

अभी तक कोई ट्रेडर्स आगे नहीं आया है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। राज्य वार कितना बजट आता है, उसे लेकर केंद्र सरकार से अभी पत्राचार नहीं हुआ है। राशि मिलने व गाइडलाइन जारी होने पर मधुमक्खी पालकों को प्रोत्साहन पैकेज देंगे। सरसों का शहद 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निकलता है।
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भारत में सबसे ज्यादा सरसों के शहद का ही उत्पादन होता है। इसमें ग्लूकोज और फ्रुक्टोज की मात्रा ज्यादा होने के कारण यह जम जाता है जिससे इसको क्रीम भी कहा जाता है।
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सरसों के शहद के उत्पादन का तरीका

शहद रत्न विनय फौगाट ने बताया कि सरसों के फूलों से जब नेक्टर चला जाता है तो उसको फूलों से लाकर मधुमक्खियां छत्ते में भर देती हैं। उस शहद को मधुमक्खी पालक सप्ताह से 10 दिन में एक बार निकाल लिया जाता है। सरसों के फूलों से करीब 7 से 8 बार शहद निकाला जाता है।

मधुमक्खी पालक अपनी मधुमक्खियों के बॉक्स को सरसों के खेत में रखते हैं। शहद निकालने की मशीन के अंदर 6 से 8 फ्रेम डाले जाते हैं। उस मशीन को रोटरी मोशन में घुमाया जाता है। जिससे सेंट्रीफुगल फोर्स जनरेट होती है, शहद निकलकर मशीन की दीवारों पर लगता हुआ नीचे बेसमेंट में कलेक्ट हो जाता है। जिसका बाद में फूड ग्रेड प्लास्टिक की बाल्टियों में भंडारण कर लिया जाता है।

तीसरा बी नट हनी प्रोसेसिंग प्लांट झज्जर में स्थापित
हरियाणा में एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र कुरुक्षेत्र में शहद प्रसंस्करण की पहली इकाई है। फतेहाबाद के शहद उत्पादक सुरेश जागलान ने भी यह मशीन लगाई है। अब झज्जर के विनय फौगाट ने बी नट हनी प्रोसेसिंग प्लांट लगाया है। शहद प्रसंस्करण संयंत्र शहद को डबल फिल्टर करता है और तापमान 40 से 45 डिग्री तक रखा जाता है।

जिससे शहद के पौषक तत्व नष्ट नहीं होते। 100 ग्राम शहद में पोलन कांउट की संख्या 50 हजार बनाए रखने के लिए 15 माइक्त्रसेन के फिल्टर का इस्तेमाल किया जाता है। विनय ने बताया कि इस प्रोसेस से हमें शुद्ध शहद मिलता है, जिसमें 180 से भी अधिक तत्व पाए जाते हैं।
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