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संगरुर: श्री गुरु ग्रंथ और पालकी साहिब के साथ हुई घटना बेअदबी नहीं, शार्ट सर्किट से लगी थी आग

Tue, 14 May 2019 02:01 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पवित्र ग्रंथ की बेअदबी
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पंजाब पुलिस ने बीते दिन मलेरकोटला के गांव हथोआ के गुरुद्वारा साहिब में घटी घटना को हल करते हुए खुलासा किया कि घटना आग लगने से हुई थी। गुरुद्वारा साहिब में अचानक आग लग गई थी, जिसके बाद अपनी नौकरी और कोताही के लिए ज़िम्मेदार ठहराए जाने के डर से ग्रंथी सिंह ने झूठी कहानी गढ़ दी। 
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यह मामला चंडीगढ़, लुधियाना और संगरूर की फोरेंसिक विशेषज्ञ टीमों के साझे प्रयास से हल हुआ, जिसमें पंजाब पुलिस द्वारा मुंबई से गोपाल रेलकर के नेतृत्व में बुलाई विशेषज्ञों की टीम का भी अपेक्षित सहयोग लिया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पटियाला रेंज के आईजी एएस राय और संगरूर के ज़िला पुलिस प्रमुख संदीप गर्ग के नेतृत्व में टीमों द्वारा किए गए काम की सराहना की।

डीजीपी दिनकर गुप्ता इन टीमों द्वारा की जा रही जांच की निगरानी के साथ-साथ मौके का लगातार जायज़ा ले रहे थे। कैप्टन ने रिकार्ड समय में मामला हल करने के लिए पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मामले राज्य में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकते हैं।
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गुरुद्वारे की दीवार पर लगे पंखे से लगी आग

पुलिस विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि जांच में यह बात सामने आई कि गांव हथोआ के गुरुद्वारा साहिब के अंदर दीवार पर लगा पंखा गर्म हो जाने के कारण आग लग गई। पंखे के आसपास लगा पीवीसी का कवर आग की लपेट में आ गया और नारंगी परना, जिससे पंखा बंधा हुआ था और जो आगे पालकी साहिब के स्तंभ के साथ बंधा था, को भी आग लग गई।

आग लगने के बाद दोनों पंखे और परना फर्श पर बिछाए ग़लीचे पर जा गिरे, जिससे आग फैलती हुई श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बीड़ तक पहुंच गई। प्रवक्ता ने बताया कि जब फोरेंसिक टीमों ने ग्रंथी जोगा सिंह से पूछताछ की और सबूतों की जानकारी मांगी तो उसने माना कि सारी कहानी उसी ने गढ़ी थी।

उसने जांच टीम को बताया कि वह डर गया था कि गांववासी उस पर लापरवाही का दोष लगाकर उसे नौकरी से निकाल देंगे, जोकि चार सदस्यों वाले उसके परिवार की आमदनी का एकमात्र साधन है। कुछ गर्मख्यालियों द्वारा गुरुद्वारा साहिब में पहुंचने और मौके का लाभ लेने ने भी ग्रंथी सिंह को शक के घेरे में नहीं आने दिया।

 
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