इंसान अपनी जिंदगी में सच्चे प्यार की तलाश में किस कदर राह भटक जाता है कि उसे सही गलत भी दिखना बंद हो जाता है। ऐसा ही हुआ है फतेहाबाद में, जहां गांव लांबा निवासी एक व्यक्ति को पहली बीवी के होते हुए दूसरा विवाह रचाना महंगा पड़ गया है। टोहाना मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विनय शर्मा की अदालत ने दूसरी शादी रचाने के आरोपी पति को दो साल की कैद और दो हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
इस मामले में आरोपी की पहली पत्नी ने ही कोर्ट में याचिका दायर कर पति पर दूसरी शादी करने का आरोप लगाया था और आखिर में इसे साबित भी कर दिया। टोहाना एवं फतेहाबाद जिले में ये अपनी तरह का एक अलग मामला था, जिसमें पहली बीवी के होते हुए दूसरी शादी करने के आरोपी पति को सजा सुनाई गई हो।
टोहाना निवासी नवजोत कौर ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विनय शर्मा की अदालत में याचिका दायर कर बताया था कि 27 जुलाई 2008 को उसका विवाह गांव लांबा निवासी बलदेव सिंह के साथ सिक्ख रीति रिवाजों के अनुसार हुआ था। नवजोत का आरोप था कि शादी में उसके पिता सर्वजीत सिंह ने लगभग छह लाख रुपये खर्च कर दिया लेकिन उसके पति का मन नहीं भरा। वो शादी के तुरंत बाद से उसे कम दहेज लाने के नाम पर प्रताड़ित करता रहा और कई बार उससे मारपीट भी की।
नवजोत ने अपनी याचिका में नवजीत कौर ने बताया कि 18 नवंबर 2011 को बलदेव से उसे एक लड़की भी हुई जिसका नाम गुरनूर रखा गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद उसके पति बलदेव सिंह ने अपनी पहली पत्नी के होते हुए भी गांव अहरवां की एक लड़की से शादी रचा ली। इतना ही नहीं, नवजोत कौर ने यह भी आरोप लगाया कि जिस लड़की से बलदेव की शादी हुई थी, शादी के समय वह नाबालिग थी। बलदेव की दूसरी शादी की सूचना मिलने पर जब नवजोत ने एतराज जताया तो उसने उसे बात करने से इंकार कर दिया।
इसके बाद नवजोत कौर ने सात जून 2013 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विनय शर्मा की अदालत में याचिका दायर कर इंसाफ की गुहार लगाई। लगभग चार साल तक चली सुनवाई के दौरान नवजोत कौर ने अपने पति पर लगाए आरोपों को साबित करने के लिए दस्तावेजी सबूत कोर्ट के सामने पेश कर दिए, जिसे उसका पति बलदेव झुठला नहीं सका। इन्हीं सबूतों के आधार पर कार्यवाही करते हुए माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विनय शर्मा की अदालत ने शनिवार को आरोपी बलदेव सिंह को दो साल की कैद एवं दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।