हिंदी हैं हम
हमारी प्यारी मीठी भाषा है हिंदी, मातृ भाषा का ताज है हिंदी
जन-जन का गौरव है हिंदी, तो फिर गर्व से क्यूं ना कहें.. हिंदी हैं हम
जन भाषा की कलम की ताकत है हिंदी, हर दिल में खास है हिंदी
हिंद देश की पहचान है हिंदी.. तो फिर गर्व से क्यूं ना कहें.. हिंदी है हम
अब तो विदेशों में भी अपना लोहा मनवा रही है हिंदी
क्योंकि हर नमस्ते का जवाब है हिंदी, तो फिर गर्व से क्यूं ना कहें.. हिंदी हैं हम
यूं तो भावों को व्यक्त करने की कोई एक भाषा नहीं होती
फिर भी इसे व्यक्त करने का सबसे खूबसूरत माध्यम है हिंदी
तो फिर गर्व से क्यूं ना कहें.. हिंदी हैं हम
- मिनाक्षी खुराना, शिक्षिका, पंचकूला
दहशत है हर मासूम के चेहरे पर
मनुष्य था प्रसन्न, अपने कार्यों से
अहम से भरा, अपने ही सवालों से
प्रकृति ने कहा भी रुक! सोच कहां चला है तू
देख स्वयं को और किए गए अपने पापों को तू
पर न रुका, ना सुन सका वो
प्रकृति के इशारों को ना समझ सका वो
परिणाम, शायद उन कर्मों का ही दिख रहा है
त्राहि माम-त्राहि माम अब स्वयं ही कर रहा है
दहशत है हर मासूम के चेहरे पर
और सहमा-सहमा सा है हर हिंदुस्तानी
अपने ही घर पर
-सीमा अग्निहोत्री, अध्यापक, सेक्टर-14 पंचकूला
सूरज की लाली
लाती जीवन में खुशहाली
संघर्ष में भी हौसला बढ़ाती
हिम्मत देती कोई स्वार्थ न रखना
अपने मन में सब के प्रति प्यार रखना
जब सूरज की किरणें फूलों पर पड़तीं
खिलते फूल सबको लुभाते
शाम को जब छुप जाते सबके मन को भाते हो
अगले दिन जब आते हो
तो स्वागत करें हम सब तुम्हारा
इतना कुछ दिया जीवन को उसके लिए प्रणाम हमारा
-रोशनी, रायपुर खुर्द, चंडीगढ़
भारत गान
चांद-सितारों से भी बढ़कर जिसका गौरव गान है,
कोई और नहीं है यह अपना भारतवर्ष महान है
बहती पावन धारा जिसमें गंगा-यमुना-सरस्वती की
जिसमें रचना हुई सर्वप्रथम कोटि ग्रंथों-उपनिषदों की
ऊंच-नीच का भेद नहीं, यहां जाति-धर्म का मेल नहीं
कबीर, नानक और कलाम-सा विश्व में कोई और नहीं
जिसमें ऋतुओं का विविध अद्भुत सा प्रावधान है
कोई और नहीं है यह अपना ही भारतवर्ष महान है
आज तिरंगा लहराता है अपनी पूरी शान से
हम ने हासिल की आजादी वीरों के बलिदान से
जिस उत्तम और उत्कृष्ट देश का यह सारा गुणगान है
कोई और नहीं है यह अपना ही भारतवर्ष महान है
अमनदीप कौर, चंडीगढ़