हिमाचल सरकार ने पीजीआई के रजिस्ट्रार पीसी अकेला को एक्सटेंशन देने से मना कर दिया है। अकेला बीते सात साल से पीजीआई में नियुक्त हैं। उन्होंने आठवें साल की एक्सटेंशन हिमाचल सरकार से मांगी थी, जो नहीं मिली। उनका कार्यकाल 31 जुलाई को खत्म हो रहा है। अनुमान लगाया जा रहा था कि सरकार फिर से अकेला पर मेहरबान हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पीजीआई पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उन्होंने अकेला की एक्सटेंशन की सिफारिश क्यों की थी? जबकि उन्हें पहले से ही दो बार एक्सटेंशन दी जा चुकी थी। पीसी अकेला ने वर्ष 2009 में एडमिनिस्ट्रेटिव आफिसर के पद पर ज्वाइन किया था। 2012 में उनका कार्यकाल खत्म होना था, लेकिन उन्हें एक साल की एक्सटेंशन दे दी गई। एक साल की एक्सटेंशन पूरी हुई तो उन्हें पीजीआई में ही रजिस्ट्रार की पोस्ट पर नियुक्ति दे दी गई।
वर्ष 2015 में उनका कार्यकाल खत्म हो गया, लेकिन पीजीआई की मेहरबानी पर उन पर जारी रही। 2015 में ही उन्हें एक्सटेंशन फिर दे दी गई। 31 जुलाई, 2016 को उनका कार्यकाल खत्म हो रहा था, लेकिन अप्रैल में ही पीजीआई प्रशासन ने उनके कार्यकाल को एक साल और बढ़ाने की सिफारिश की थी।
अब उन्हें वापस अपने प्रदेश लौटना होगा। पीजीआई एंटी करप्शन फ्रंट के चेयरमैन सुभाष चंद्र ने सवाल उठाते हुए कहा कि बार-बार एक्सटेंशन मिलने का मकसद भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है। पीजीआई के अधिकारी भी इसमें साथ दे रहे हैं। कई बार इस मुद्दे को उठाया है।