रेट का मुद्दा भी सुलझाना होगा
सूत्रों के अनुसार हिमाचल सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि हरियाणा सरकार जिन कंपनियों से बिजली खरीदती है, उसे उनके साथ ही रेट को लेकर मुद्दा सुलझाना होगा। प्रदेश सरकार उसमें उनकी इतनी मदद कर सकती है कि बातचीत के जरिये नए रेट को कम कराया जा सके।
पहले 336 करोड़, अब हो सकता है 150 करोड़
पहले के प्रस्ताव के मुताबिक अगर सेस लगता है तो प्रत्येक यूनिट पर एक रुपये से अधिक खर्च आना था और सालाना हरियाणा पर 336 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ना था। नेगोसिएशन के विकल्प के तौर पर अब इसे 50 पैसे प्रति यूनिट करनी की योजना है। इससे हरियाणा पर करीब 150 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा।
निजी क्षेत्र के मुकाबले काफी सस्ती मिलती है बिजली
वर्तमान में हरियाणा को कुल 1325 मेगावॉट बिजली हिमाचल प्रदेश के हाइड्रो प्लांट से मिलती है। इसमें से 846 मेगावॉट बिजली बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) के माध्यम से, 64 मेगावॉट नाथपा झाकड़ी और एनएचपीसी के माध्यम से 415 मेगावॉट बिजली मिलती है। वर्तमान में 59 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। नाथपा झाकड़ी से मिलने वाली बिजली की दर 2.36 रुपये प्रति यूनिट है। एनएचपीसी से मिलने वाली बिजली 2 से 2.5 रुपये प्रति यूनिट तक है। निजी क्षेत्र में बिजली के रेट 5 से 7 रुपये प्रति यूनिट है।
ज्वलंत मुद्दों पर राज्य सरकारों में संवाद जरूरी: कुलदीप पठानिया
गुरुवार को चंडीगढ़ पहुंचे हिमाचल प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि ज्वलंत मुद्दों पर राज्य सरकारों में संवाद जरूरी है। जब राज्य सरकारें आमने-सामने बैठ कर वार्ता करेंगी तो सुलह भी जरूर बनेगी। किसी मुद्दे पर आम सहमति के लिए बातचीत जरूरी है। बातचीत से ही मतभेद दूर होंगे और समस्या का समाधान निकलेगा।
सेस देने से हरियाणा का साफ इंकार
मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है कि वाटर सेस लगाने का फैसला अंतरराज्यीय जल विवाद अधिनियम-1956 के खिलाफ है। 1960 के सिंधु जल समझौते के कारण केंद्र सरकार के पास इस मामले में हस्तक्षेप के अधिकार है। लिहाजा कोई राज्य अकेले इस संदर्भ में फैसला नहीं कर सकता। हरियाणा वाटर सेस देने के लिए बाध्य नहीं है।