किसान जगमिंदर सिंह और सुखचैन सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
नौकरी मिली नहीं, अब सरकार खेती भी छीन रही है
पटियाला के किसान जगमिंदर सिंह का कहना है कि उन्होंने इंजीनियरिंग की है, लेकिन हमारे यहां नौकरी ही नहीं है। इसलिए खेती करते हैं, जिससे परिवार का गुजारा हो जाता है। इतना पढ़कर खेती करनी पड़ रही थी और अब यह खेती भी सरकार छीन रही है। जिस तरह के कृषि कानून बनाए गए हैं, उनका हमें कोई फायदा नहीं होगा।
एमए करके भी नौकरी नहीं मिली तो खेती कर रहा हूं। मेरे कई साथी पीएचडी किए हुए हैं, लेकिन वह भी खेती कर रहे हैं। खेती ही हमारा सब कुछ है और अब इसे भी सरकार छीन रही है। इसलिए कृषि कानूनों को रद्द करना चाहिए और इसके लिए हम हर तरह की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। - सुखचैन सिंह, पटियाला।