मोगा पुलिस पर बाघापुराना से बेअंत सिंह को उसके घर से उठाने का आरोप लगाते हुए दाखिल की गई याचिका पर जवाब दाखिल न करना पंजाब के डीजीपी को भारी पड़ गया। बुधवार को जस्टिस दया चौधरी की कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब डीजीपी का जवाब नहीं पहुंचा तो उन्होंने उन पर 25 हजार का जुर्माना लगा दिया। साथ ही जस्टिस दया चौधरी ने कहा- क्यों न डीजीपी को अगली सुनवाई पर कोर्ट में बुलाया जाए? उन्होंने कहा अफसर मामले में सीरियस नजर नहीं आ रहे है।
22 मई को हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए डीजीपी को एफिडेविट फाइल करने के लिए कहा था। इसके लिए 2 हफ्ते का समय दिया गया लेकिन जब केस सुनवाई के लिए पहुंचा तो डीजीपी की तरफ से किसी तरह का कोई एफिडेविट फाइल नहीं किया गया। बेअंत सिंह की अपील पर वॉरंट अफसर को नियुक्त किया गया था जिसके मुताबिक बेअंत सिंह पर कोई मामला दर्ज नहीं था। उनकी रिपोर्ट में साफतौर पर लिखा था कि बेअंत सिंह ने पिछले साल जो मोबाइल खरीदे थे वो पुलिस के पास से बरामद हुए।
हालांकि एसएसपी राजजीत द्वारा दाखिल की रिपोर्ट इससे बिल्कुल उल्टी तस्वीर पेश कर रही थी। उन्होंने बेअंत सिंह पर मामला दर्ज करते हुए उसे समन तक भेजे दिखा दिए थे। जिस पर जस्टिस सुधीर मित्तल ने ये कह दिया था कि 2 फरवरी को मिली जानकारी में 2 दिन के बीच समन भेजकर बेअंत को उठा लिया। पंजाब पुलिस इतनी तेज कब से हो गई। फिलहाल केस जस्टिस दया चौधरी सुन रही हैं। एसएसपी राजजीत और वारंट अफसर द्वारा दिए एफिडेविट विरोधाभासी पाए जाने के कारण कोर्ट ने डीजीपी पंजाब को इस मामले में जांच कर 2 हफ्तों में एफिडेविट फ़ाइल करने के लिए कहा था।
यह है मामला
मोगा पुलिस ने बाघापुराना के बेअंत सिंह को 4 फरवरी को घर से उठाया था। बेअंत का आरोप है कि उसे जमकर पीटा गया और कहा कि नीटा और उसका भी एनकाउंटर करेंगे और ड्रग्स का केस डालेंगे। जिसके बाद बेअंत सिंह की पत्नी द्वारा हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। जिसमे पंजाब पुलिस पर सवाल खड़े हुए हैं कि उन्होंने बेअंत सिंह पर बिना किसी केस के उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में जिन पुलिस अफसरों के नाम सामने आए हैं वो पहले से ही विवादित मामलों से जुड़े हुए हैं।