पंजाब में 6 हजार करोड़ के ड्रग रैकेट की जांच कर रहे ईडी अधिकारी निरंजन शाह के तबादले पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया है। शाह के तबादले पर रोक लगाने की मांग करते हुए मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी। अर्जी पर आज सुनवाई हुई।
विज्ञापन
ड्रग मामले में मुख्य पैरवीकार एडवोकेट नवकिरन सिंह ने अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि यह तबादला राजनीति से प्रेरित है। यह आरोप भी लगाया गया था कि अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए पंजाब पुलिस उनकी संपत्तियों का ब्योरा एकत्र कर रही है।
अर्जी में कहा गया था कि ईडी इस बड़े रैकेट में पुलिस अधिकारी परमराज सिंह उमरानंगल, सीपीएस अविनाश चंद्र, मंत्री स्वर्ण सिंह फिल्लौर, उनके बेटे दमनवीर, संसद मेंबर चौधरी संतोख सिंह के अलावा राजस्व मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया से पूछताछ कर चुकी है और मजीठिया को दोबारा बुलाने की भी संभावना हैं।
विज्ञापन
निरंजन शाह का तबादला कर दिया गया था
अर्जी में आगे कहा गया है कि निरंजन सिंह मुख्य जांच अधिकारी हैं और जांच लगभग मुकम्मल होने वाली है। पंजाब के लोगों को इस जांच से बड़ी उम्मीद है कि इसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होगा और सच्चाई सामने आएगी। ऐसे में निरंजन सिंह का तबादला कोलकाता करने के पीछे राजनीति झलक रही है।
अर्जी में कहा गया था कि ईडी की ओर से तबादले के पीछे कारण बताया गया है कि कोलकाता में शारदा चिट फंड घोटाले की जांच है ताकि नरंजन सिंह जैसे होनहार अधिकारी को यह जांच सौंपी जाए।
एडवोकेट नवकिरन सिंह ने कहा था कि बेशक शारदा घोटाला बड़े स्तर का घोटाला है, लेकिन पंजाब में नशा तस्करी से युवाओं की जिंदगी तबाह हो रही है। ऐसे में शारदा घोटाले से अधिक जरूरी ड्रग रैकेट की जांच है।
अर्जी में कोयला खदान आवंटन घोटाले और टूजी घोटाले की जांच के दौरान जांच अधिकारियों का तबादला कर दिए जाने का भी जिक्र किया गया और हाईकोर्ट को बताया गया था कि बड़े स्तर पर विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने न केवल अधिकारियों के तबादले पर रोक लगाई थी, बल्कि आदेश दिया था कि इन घपलों की जांच के अलावा ट्रायल मुकम्मल होने तक अधिकारियों का तबादला न किया जाए।
ईडी अधिकारी के तबादले पर बोले दिग्गज
बहुचर्चित पंजाब ड्रग रैकेट की जांच कर रहे ईडी अधिकारी के तबादले की दिग्गज नेताओं ने कड़ी आलोचना की है।
मामले की जांच पंजाब से बाहर ले जाने की मांग
ईडी के सहायक निदेशक निरंजन सिंह को कोलकाता ट्रांसफर किए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। वे पंजाब के कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया व अन्य अकाली नेताओं के खिलाफ ड्रग्स तस्करी मामले में जांच कर रहे थे।
कांग्रेस ने इसे जांच को प्रभावित करने और शिअद व भाजपा के बीच हुई डील करार दिया। कांग्रेस में मामले की जांच पंजाब से बाहर सीबीआई, सुप्रीम कोर्ट या फिर हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाने की मांग की है।
पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप बाजवा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। वहीं, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चौ. सुनील जाखड़ और पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत बादल ने तबादले की आलोचना की है।
जांच को भटकाने की कोशिश : बाजवा
पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप बाजवा ने कहा है कि यह जांच को भटकाने की कोशिश है। सत्ताधारियों ने नारको टैरोरिज्म रैकेट को दबाने की आपराधिक साजिश की है, क्योंकि मजीठिया ताकतवर नेताओं में से एक हैं।
ईडी वित्त मंत्री अरुण जेतली के अधीन आती है और इस तबादले ने साबित कर दिया है कि केंद्र सरकार जांच को किस तरह से प्रभावित कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में बाजवा ने कहा कि ऐसे गंभीर हालात में पंजाब के भविष्य के मद्देनजर रैकेट की सीबीआई जांच जरूरी है, जिससे दोनों अकाली दल व भाजपा खेल रहे हैं।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि भाजपा का इस मसले पर एकदम से स्टैंड बदलना स्पष्ट करता है कि दोनों पार्टियों के बीच इस मसले पर समझौता हो गया है।
इसकी भनक उसी दिन लग गई थी, जब माघी मेले पर पहुंचे पंजाब भाजपा अध्यक्ष कमल शर्मा की मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने तारीफ की थी। इससे पहले कमल शर्मा लगातार मजीठिया के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
जाखड़ ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पंजाब का उप मुख्यमंत्री पद हासिल करने केलिए इस मसले पर यू-टर्न लेते हुए मुख्य ईडी अधिकारी को बदला है। इसका खुलासा दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हो जाएगा।
जांच को ठप करने की साजिश: मनप्रीत पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल ने कहा है कि ईडी अधिकारी का तबादला मामले की जांच को ठप करने की साजिश है। यह सियासी दबाव का नतीजा है। भाजपा ने शिअद नेताओं को फायदा पहुंचाने और अपने लिए पंजाब सरकार में बढ़िया पद हासिल करने के लिए यह कार्रवाई की है।