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Highcourt: कन्या भ्रूण की हत्या सबसे बुरी हिंसा... HC ने खारिज की नोडल अधिकारी के क्लर्क की जमानत याचिका

Fri, 31 May 2024 11:53 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कोर्ट ने कहा कि अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में, सभी वर्ग, शिक्षा समूहों, जातियों, जनजातियों, धर्मों और राज्यों के पुरुष और महिलाएं बेटों को प्राथमिकता देते हैं। उदाहरण के लिए, 81 प्रतिशत विवाहित महिलाएं और 74 प्रतिशत विवाहित पुरुष कम से कम एक बेटा चाहते थे, और एक चौथाई पुरुष और महिला बेटियों की तुलना में ज़्यादा बेटे चाहते थे।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भ्रष्टाचार के मामले में एक अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या महिलाओं पर हिंसा का सबसे बुरा रूप है क्योंकि यह जीवन के मौलिक अधिकार से वंचित कर देता है। हाईकोर्ट ने कहा कि गिरता लिंगानुपात आज जमीनी हकीकत हो गया है, अधिकारियों को गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या को रोकने के लिए कदम उठाने की हाईकोर्ट ने अधिकारियों को हिदायत दी है।
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हाईकोर्ट में पीएनडीटी अधिनियम के तहत पानीपत में मौजूद नोडल अधिकारी के क्लर्क नवीन की अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। आरोप के अनुसार याची ने नोडल अधिकारी के साथ मिलीभगत कर डॉक्टर को जारी नोटिस का निपटारा करने के लिए दो लाख रुपये रिश्वत मांगी थी।

कोर्ट ने कहा कि पैसे की वसूली के अवलोकन से अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त सबूत एकत्र किए हैं जो प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं और वह अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है। जस्टिस अनूप चितकारा ने कहा पीएनडीटी के तहत नोडल एजेंसियों को नैतिकता के उच्चतम मानकों के साथ काम करना चाहिए। ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील, शक्तिशाली पदों पर बैठे अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को गर्व से निभाने के बजाय, अवैध वित्तीय लाभ के लिए नैतिकता, सम्मान, कर्तव्यों को गिरवी रख रहे है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता का काम अल्ट्रासाउंड करने के लाइसेंस वाले क्लीनिकों पर नजर रखना था। अल्ट्रासाउंड स्कैन से भ्रूण का लिंग का पता कर भ्रूण में कन्या पाई जाती है तो गर्भपात कर दिया जाता है। शर्मनाक और घिनौनी जमीनी हकीकत यह है कि इसके कारण जनसंख्या में महिलाओं का अनुपात कम हो रहा है। 
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कोर्ट ने कहा कि अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में, सभी वर्ग, शिक्षा समूहों, जातियों, जनजातियों, धर्मों और राज्यों के पुरुष और महिलाएं बेटों को प्राथमिकता देते हैं। उदाहरण के लिए, 81 प्रतिशत विवाहित महिलाएं और 74 प्रतिशत विवाहित पुरुष कम से कम एक बेटा चाहते थे, और एक चौथाई पुरुष और महिला बेटियों की तुलना में ज़्यादा बेटे चाहते थे। सामाजिक सुरक्षा या सार्वभौमिक बुनियादी आय के अभाव में, पितृस्थानीयता और पितृवंशीयता ऐसी वरीयता के प्रमुख कारण हैं। कन्या भ्रूण हत्या शायद महिलाओं के खिलाफ हिंसा के सबसे बुरे रूपों में से एक है, जहां एक महिला को उसके सबसे बुनियादी और मौलिक अधिकार यानी जीवन के अधिकार से वंचित किया जाता है।

आंकड़ों का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2011 में वैश्विक महिला जनसंख्या अनुपात 1000:984 था जबकि भारत में यह 1000:943 था। हरियाणा में तो यह 1000:879 ही था। लिंग अनुपात में सुधार के लिए उठाए गए कदमों को भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों द्वारा खंडित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। संवेदनशील पदों पर बैठे अधिकारी इस तरह के काम कर अपने पद के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। इस प्रकार जो लोग अपने छोटे से मौद्रिक लाभ के लिए ऐसे संवेदनशील पदों का दुरुपयोग करते हैं, वे न केवल उस विश्वास को धोखा देते हैं जो व्यवस्था ने उन पर जताया है, बल्कि समाज को भी विफल करते हैं।
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