हरियाणा में जजों की नियुक्ति को लेकर गत 16 जुलाई को हुई एचसीएस (ज्यूडिशियल) की परीक्षा में पेपर लीक की जांच सीबीआई को सौंपे जाने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है। सीबीआई ने इस मामले में पक्ष बनाए जाने की मांग को लेकर अर्जी दायर की थी। मंगलवार को हाईकोर्ट ने इस अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में चंडीगढ़ में एफआईआर दर्ज होनी है और चंडीगढ़ पुलिस द्वारा मामले की जांच के लिए पहले ही तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया जा चुका है। इसे देखते हुए फिलहाल मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द करने की जरूरत नहीं है।
जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस जीएस संधावलिया की फुल बेंच ने मंगलवार को सुनवाई शुरू होते ही पूछ लिया कि इस मामले में एफआईआर किसकी तरफ से दर्ज की जाए। इस पर याचिकाकर्ता सुमन के वकील मंजीत सिंह ने कहा कि पहले भी उनकी शिकायत पर ही जांच हुई है, इसलिए उन्हें ही एफआईआर दर्ज कराने की इजाजत दी जाए। उन्होंने कहा कि वैसे भी ज्यादातर केसों में शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद ही एफआईआर दर्ज करके जांच का काम शुरू किया जाता है।
इस पर फुल बेंच ने पूछा कि कहीं वे बाद में किसी दबाव का जिक्र करते हुए अपना बयान तो नहीं बदलेंगे। इस पर मंजीत सिंह ने कहा कि उन पर दबाव जरूर है। तब बेंच ने पूछा कि उन पर कौन दबाव बना रहा है, मंजीत सिंह ने कहा कि आरोपी उन पर दबाव बना रहे हैं। इसके बावजूद वे इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने को तैयार हैं।