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हाईकोर्ट में आज पक्ष रखेगी फरीदकोट पुलिस

Mon, 11 Aug 2014 10:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
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ढाई माह से अपह्त युवक मनोज कपूर के परिवार की तरफ से सीबीआई जांच करवाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में मंगलवार को सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय के निर्देश के चलते इस केस में मंगलवार को फरीदकोट पुलिस की तरफ से अपनी जांच रिपोर्ट और पक्ष रखे जाने के आसार हैं।
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शहर के मोहल्ला तालाब निवासी मनोज कपूर का अपहरण इसी साल 25 मई रविवार को हुआ था। सरकारी बैंकों की एटीएम मशीनों में पैसा भरने वाली एक निजी कंपनी में कार्यरत मनोज कपूर के अपहरण के कुछ घंटे बाद ही तीन एटीएम मशीनों से करीब 19 लाख उड़ाए गए थे। इन मशीनों का पासवर्ड मनोज कपूर के पास था। मनोज कपूर की बहन नीतू के अनुसार घटना वाले दिन अपहरण का शक होते ही उनके परिवार ने कोतवाली पुलिस को सूचित कर दिया था लेकिन किसी भी अधिकारी ने न तो उनकी बात पर यकीन नहीं किया और न ही किसी तरह की कार्रवाई करने में दिलचस्पी दिखाई। पुलिस ने घटना के 24 घंटे बाद रोष प्रदर्शन करने पर केस दर्ज किया था। इसी वजह से उनका परिवार शुरू से ही इस मामले को सीबीआई के हवाले करने की मांग कर रहा है।


न्याय को भटक रहे बीएसएफ के जवान
फरीदकोट। बच्चों के अपहरण की घटनाओं में फरीदकोट पुलिस की लापरवाही के कारण देश की सुरक्षा में तैनात बीएसएफ जवानों को भी दर दर की ठोकरें खाने पड़ रही है। बीएसएफ कालोनी में रहते जवान रविंदर कुमार का बेटा आदर्श (14) और उसका भांजा हर्षित शर्मा (17) भी पिछले साल 17 अक्तूबर को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। घटना के कुछ दिन बाद पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर लिया था लेकिन अभी तक पुलिस दोनों बच्चों का कोई सुराग नहीं लगा पाई है। दोनों का परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से संबंधित है। आदर्श के पिता रविंदर की तरह हर्षित का पिता भी बीएसएफ में जवान है और इन दिनों छत्तीसगढ़ में ड्यूटी कर रहा है। हालांकि अब ऐसे सभी मामलों को लेकर डीआईजी की निगरानी में विशेष जांच टीम गठित हो चुकी है लेकिन फिर भी पुलिस के हाथ खाली हैं।
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घटना से पुलिस लापरवाही के खुले राज
फरीदकोट। मनोज कपूर के अपहरण की घटना ने पुलिस की लापरवाही के कई राज खोल कर रख दिए। घटना के दो दिन बाद ही जब पीड़ित परिवार ने थाना कोतवाली के धरना शुरू किया तो धीरे-धीरे शहर से अगवा अन्य बच्चों और नौजवानों के परिवार भी वहां पहुंचने लगे। अब तक अपहरण के ऐसे करीब 30 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें शिकायत मिलने के बावजूद पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। राजस्थान के गंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में नहरों से अज्ञात शव मिलने के मामलों को भी फरीदकोट समेत आसपास के जिलों में नौजवानों के लापता होने की घटनाओं से जोड़ कर देखा जा रहा है।


पिछले सात साल में राजस्थान पुलिस ने अपने इन दोनों जिलों से 704 अज्ञात शव बरामद किए हैं और इनमें से ज्यादातर शव पंजाब से निकलने वाली इंदिरा गांधी नहर और गंग नहर से मिले हैं। राजस्थान पुलिस का मानना है कि यह लाशें ऐसे लोगों की हो सकती है जिनकी हत्या के बाद शव को नहर में फेंक दिया जाता है। पिछले एक पखवाडे़ के दौरान फरीदकोट में भी हत्या के दो ऐसे मामले सामने आ चुके है जिनमें आरोपियों ने शवों को ठिकाने के लिए राजस्थान नहर का उपयोग किया था।


पुलिस का रटा-रटाया बयान, जांच जारी है
फरीदकोट में मनोज कपूर के मामले समेत अन्य लापता बच्चों के मामलों को लेकर काफी गंभीरता से जांच चल रही है और कुछ मामलों को सुलझाया भी जा चुका है। राजस्थान में अज्ञात शवों के बरामद होने के चलते वहां की पुलिस से भी मदद लेकर फरीदकोट से लापता लोगों की पड़ताल हो रही है।
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मोहनीश चावला, डीआईजी और एसआईटी प्रमुख
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