पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पीएनजीआरबी और पंजाब सरकार को फटकार लगाई। पंजाब के तीन प्रमुख शहरों में सीएनजी पाइपलाइन बिछाकर फिलिंग स्टेशन खोलने के प्रोजेक्ट को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) और पंजाब सरकार ने अपनी दलीलें रखीं, जिन पर जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई।
जस्टिस सारों ने कहा कि सब एक से दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि आपसे यह काम हो सकेगा। यह काम आप लोगों के बस का नहीं है। हालांकि, खंडपीठ ने मौजूद पक्षों की दलीलें सुनने और पंजाब सरकार के आग्रह पर मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई तय कर दी।
इस मामले में सुनवाई के दौरान पीएनजीआरबी के एडवोकेट सुनील कुमार राय ने हाईकोर्ट को बताया कि लुधियाना और जालंधर में मैसर्स जय मधोक एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बिछाने के लिए 26 जून, 2015 को अलॉट किया गया था, लेकिन कंपनी की ओर से काम शुरू नहीं करने पर 4 जुलाई, 2016 को जवाब तलब किया गया। राय ने आगे कहा कि जय मधोक कंपनी ने पीएनजीआरबी को 11 जुलाई को जवाब दिया है, जिस पर विचार किया जा रहा है और जल्दी ही फैसला लिया जाएगा। वहीं, जालंधर क्षेत्र के मामले में कंपनी को 19 जुलाई, 2016 को पेश होने के लिए बुलाया गया है।
इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट को बताया कि अमृतसर क्षेत्र में गैस पाइपलाइन का काम मैसर्स गुजरात स्टेट पेट्रोनेट लिमिटेड को सौंपा गया है। पीएनजीआरबी ने इस कंपनी को भी बीती 2 जून को पत्र लिखकर काम नहीं शुरू कर पाने की वजह पूछी है। इस बीच, कोर्ट में उपस्थित मैसर्स गुजरात स्टेट पेट्रोनेट के वकील ने बताया कि पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों से क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो सका है। कंपनी ने अमृतसर म्युनिसिपल कारपोरेशन को कई बार रिप्रेजेंटेशन देकर 4.7 किलोमीटर के लिए रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की है, लेकिन म्युनिसिपल कारपोरेशन इसके एवज में 4,06,56,334 रुपये की मांग कर रहा है।
इसके अलावा अन्य विभागों वन एवं वन्य जीव, एनएचएआई, उत्तरी रेलवे, ग्रामीण एवं पंचायत विभाग, पीडब्ल्यूडी, मंडी बोर्ड अमृतसर और सिंचाई (नहर) विभाग मजीठा डिवीजन अमृतसर के कार्यकारी इंजीनियर से अनुमति/क्लीयरेंस मिलना बाकी है। इस पर पंजाब सरकार ने कोर्ट से कुछ और समय देने का आग्रह किया ताकि म्युनिसिपल कारपोरेशन अमृतसर की ओर से कंपनी से की गई मांग और अन्य मामलों की छानबीन की जा सके।