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हजारों कर्मियों के लिए दीवाली का बड़ा तोहफा, दिल झूम उठेगा जानकर

Sun, 23 Oct 2016 01:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंचकूला में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री खट्टर - फोटो : अमर उजाला
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हजारों कर्मचारियों को बीजेपी सरकार ने दीवाली का बहुत बड़ा तोहफा दे दिया है। जानकार आपका दिल खुशी झूम उठेगा। हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के कर्मियों और अधिकारियों को मेडिकल री-इंबर्समेंट सुविधा देने के आदेश जारी हुए हैं।
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कर्मियों की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य के अन्य सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की तर्ज पर मेडिकल री-इंबर्समेंट सुविधा देने के आदेश हरियाणा सरकार को जारी किए हैं।

जस्टिस कुलदीप सिंह ने इस विषय पर हाउसिंग बोर्ड कर्मियों की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिये। कृष्ण चंद्र और आत्म प्रकाश सेतिया सहित हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के कई कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने उन्हें मेडिकल री-इंबर्समेंट की सुविधा देने से इंकार कर दिया है।
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जबकि उनकी नियुक्ति भी उन्हीं शर्तों और नियमों के तहत हुई है, जिनके तहत राज्य के अन्य सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति होती है। ऐसे में हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों व अधिकारियों को भी अन्य सरकारी कर्मियों की तरह मेडिकल री-इंबर्समेंट की सुविधा मिलनी चाहिए।
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हाईकोर्ट को सरकार ने ये जवाब दिया था

कोर्ट - फोटो : डेमो फोटो
हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि हरियाणा हाउसिंग बोर्ड का गठन 1971 में एक्ट के तहत किया गया था। इसके कर्मियों को अलाउंस जारी करने का मामला हरियाणा ब्यूरो ऑफ पब्लिक इंटरप्राइज के तहत आता है और इसकी इजाजत वित्त विभाग से ली जाती है।

सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा ब्यूरो आफ पब्लिक एंटरप्राइज ने मार्च 2005 में एक पत्र जारी कर कहा था कि हरियाणा हाउसिंग बोर्ड ने अपने कर्मियों के लिए पेंशन स्किम अडॉप्ट नहीं किया है, इसलिए बोर्ड के कर्मियों को मेडिकल री-इंबर्समेंट की सुविधा भी नहीं दी जा सकती।

मामले की सुनवाई के दौरान याची की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि कर्मियों की नियुक्ति इसी शर्त पर नियुक्ति हुई थी कि उन्हें अन्य सरकारी कर्मियों की तरह ही वेतन और अन्य सुविधाएं तब तक दी जाएंगी, जब तक बोर्ड अपने नियम खुद नहीं बनाता।

जस्टिस कुलदीप सिंह ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि बोर्ड ने भले ही बाद में अपने नियम बना लिए हों, लेकिन यह कहीं भी नहीं तय किया गया कि इन कर्मियों को मेडिकल री-इंबर्समेंट नहीं दी जाएगी।

महज इस दलील पर कि इन्हें पेंशन नहीं दी जाती है, इसीलिए इन्हें मेडिकल री-इंबर्समेंट की सुविधा नहीं मिल सकती, यह पूरी तरह से गलत है। इसलिए हरियाणा सरकार इन कर्मचारियों व अधिकारियों को मेडिकल री-इंबर्समेंट की सुविधा दे।
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