हुडा मल्टीपल प्लॉट अलॉटमेंट मामले में बुधवार को अहम आदेश जारी करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी 2045 मामलों में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के इन आदेशों के चलते अब कई नौकरशाह, नेता और उनके करीबियों पर तलवार लटक गई है, क्योंकि उनके नाम मल्टीपल अलॉटमेंट करवाने वालों की सूची में शामिल हैं।
कोर्ट ने हरियाणा सरकार की स्टेटस रिपोर्ट को भी नामंजूर कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जब यह तय हो गया कि ये मल्टीपल अलाटमेंट के मामले हैं तो इन पर केस दर्ज होने चाहिए।
हरियाणा सरकार की तरफ से कहा गया कि इस मामले में लाभार्थियों के खिलाफ कार्रवाई हुडा की तरफ से वेरिफिकेशन के बाद ही की जाएगी। पुलिस इस मामले में खुद कोई कार्रवाई नहीं करेगी। हुडा की तरफ से शिकायत मिलने के बाद ही उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इसके लिए प्रत्येक जिले में स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम का गठन किया गया है। एसीपी अथवा डीएसपी स्तर का अधिकार टीम को हेड कर रहा है। टीम में उन पुलिस अधिकारियों को ही लिया गया है जो इस तरह के मामलों की जांच करने में सक्षम हैं।
हरियाणा सरकार ने बताया, अभी तक 602 केस दर्ज किए
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इससे पहले हरियाणा सरकार की ओर से बताया गया कि अभी तक 602 केस दर्ज किए गए हैं। इन केस में से 19 अनट्रेस हैं और 81 को बाद में कैंसिल कर दिया गया। वहीं 502 मामलों में आगे की जांच जारी है और कुछ मामलों में चालान पेश किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट को भी अस्वीकार कर दिया। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अभी तक जो कार्रवाई की गई है वह पैसा वसूली का जरिया बनी है। लोगों को गिरफ्तारी के नाम से डराया जा रहा है और उनसे उगाही की जा रही है।
बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआर दास मामले में दी गई जजमेंट का हवाला देकर मल्टीपल अलॉटमेंट मामले में झूठा हलफनामा देने वाले अलॉटी के खिलाफ एफआईआर का विरोध किया। उनके अनुसार अगर कोई झूठा हलफनामा देता है तो उसकी दस प्रतिशत राशि, जो प्लाट लेने से पहले हुडा को दी गई होती है, वो जब्त की जा सकती है और प्लाट का आवंटन रद्द किया जा सकता है।
अफसरों ने कई प्लाट और फ्लैट अलाट करवा लिए
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याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि पहले हरियाणा में प्लाट आवंटन से पहले हरियाणा रिहायशी प्रमाण पत्र होना जरूरी था लेकिन अधिकारियों ने नियमों को तोड़ कर हुडा के प्लाट, फ्लैट और कई हाउसिंग सोसाइटी में कई कई प्लाट अलाट करवा लिए।
याचिकाकर्ता ने कहा कि आम आदमी पर मामला दर्ज किया जा रहा है जबकि हुडा के अधिकारियों ने हुडा को प्रापर्टी डीलर बना कर रख दिया। कोर्ट ने कहा कि, वर्ष 2013 से यह मामला हाई कोर्ट में चल रहा है।
इसकी जांच के लिए कमेटी भी गठित की गई । कमेटी और सरकार की रिपोर्ट में कई विरोधाभास सामने आए हैं। इसके चलते कई के खिलाफ एफआईआर. दर्ज नहीं हुई और कई के खिलाफ दर्ज एफआईआर में कैंसिलेशन रिपोर्ट दायर की गई। यह नहीं कहा जा सकता कि कहां गलती हुई है।