चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में अपार्टमेंट के प्रावधान मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट के आदेश पर एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल ने कहा कि प्रशासन ने पहले खुद ढील देनी आरंभ की थी और अब फ्लोर के बंटवारे में प्रतिशत का फेर लोगों को थानों और अदालतों में लाकर खड़ा कर रहा है।
मामले की सुनवाई आंरभ होते ही यूटी के आला अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। एडिशनल सेक्रेटरी एस्टेट अमित तलवार और चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया ने चंडीगढ़ प्रशासन का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि शहर में 3 फ्लोर को मंजूरी दे रहे हैं अपार्टमेंट को नहीं। खंडपीठ ने कहा कि अभी तक प्रशासन ही इस मामले में कंफ्यूज है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि चंडीगढ़ में प्लाट को प्रतिशत के अनुसार बांटने का प्रावधान है, लेकिन फ्लोर के अनुसार नहीं।
इस पर चेतन मित्तल ने कहा कि पहले शहर में दो फ्लोर का प्रावधान था और फिर एक बरसाती फ्लोर की अनुमति दी गई। इसके बाद तीसरे फ्लोर को मंजूरी दे दी गई। फिर सभी फ्लोर के लिए अलग-अलग बिजली के कनेक्शन को मंजूरी दी गई और अब तो पानी के कनेक्शन भी अलग-अलग कर दिए गए हैं।
प्लाट को प्रतिशत के अनुसार बांटने का प्रावधान है
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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मित्तल ने कहा कि प्रतिशत आधार पर प्रापर्टी को बांटने को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जिस प्रकार की स्थितियां पैदा हो रही हैं, उससे इसे अपार्टमेंट में बांटा जाना ही सही विकल्प है। इस पर दोनों अधिकारियों से हाईकोर्ट ने सवाल पूछना आरंभ किया और आखिर तक प्रशासन के अधिकारी प्रशासन की ओर से लिए गए पूर्व के स्टैंड पर कायम रहे।
इस दौरान प्रशासन की ओर से बताया गया कि वे इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि हमें इस केस में कोई दिलचस्पी नहीं है। शहर और शहरवासियों के हित का मामला है, इसलिए इसे सुना जा रहा है। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई को टाल दिया।
इस मामले को लेकर सेक्टर-10 की रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से उसके सचिव और अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों से सेक्टर-10 सहित कई जगहों पर रिहाइशी प्लॉट्स का अवैध तरीके से निर्माण कर उन्हें अपार्टमेंट्स के तौर पर आगे बेचा जा रहा है।
यह न सिर्फ चंडीगढ़ के मास्टर प्लान के खिलाफ है, बल्कि प्रशासन के कई बायलॉज और निर्देशों का उल्लंघन भी है। अगर अपार्टमेंट के प्रावधान को मंजूरी दी गई है तो इससे शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बोझ काफी बढ़ जाएगा, क्योंकि जब एक ही प्लॉट्स की अलग-अलग मंजिल को अलग-अलग लोगों को बेचा जाएगा तो उस जगह पर जनसंख्या का घनत्व काफी बढ़ जाएगा।