रोपड़ निवासी प्रेम सिंह ने एडवोकेट अमन शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि वह 2012 में रिटायर हुआ था, लेकिन एक आपराधिक मामले के कारण उसे पेंशन लाभ नहीं जारी किए गए। इस मामले में उसे 2012 में दोषी करार दिया गया था, लेकिन बाद में प्रोबेशन पर रिहा कर दिया गया।
शिक्षक को रिटायरमेंट के बाद एक आपराधिक मामले के चलते पेंशन के लिए 12 साल इंतजार करवाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने अब इस अवधि के लिए याची को 6 प्रतिशत ब्याज देने और मुआवजे के तौर पर 25 हजार रुपये जारी करने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए रोपड़ निवासी प्रेम सिंह ने एडवोकेट अमन शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि वह 2012 में रिटायर हुआ था, लेकिन एक आपराधिक मामले के कारण उसे पेंशन लाभ नहीं जारी किए गए। इस मामले में उसे 2012 में दोषी करार दिया गया था, लेकिन बाद में प्रोबेशन पर रिहा कर दिया गया। इसके बावजूद याची को पूरी पेंशन न देकर केवल एक तिहाई हिस्सा जारी किया गया।
इसके बाद याची ने 2019 में हाईकोर्ट की शरण ली और 2022 से उसे पूरी पेंशन शुरू की गई। इसके बाद मई 2024 में उसे पेंशन का एरियर जारी किया गया। याची ने बताया कि एरियर जारी करते हुए उसे ब्याज का भुगतान नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने पाया कि याची की पेंशन रोकने से पहले कोई विभागीय जांच नहीं हुई। बिना किसी वैध कारण के याची के पेंशन लाभ रोके गए जो याची का अधिकार था।
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हाईकोर्ट ने अब एरियर की राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज का भुगतान करने का पंजाब सरकार को आदेश दिया है। इसके साथ ही पेंशन जारी करने में हुई देरी के लिए पंजाब सरकार पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए यह राशि याची को भुगतान करने का आदेश दिया है।