पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के नरवाना से गायब युवक-युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत संबंधी जांच पर पुलिस को फटकार लगाई है।
कोर्ट ने संबंधित एसएचओ से पूछा कि अगर ये उनके बच्चे होते तो भी जांच में क्या ऐसी ढिलाई बरती जाती। जस्टिस राजीव भल्ला ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला ऑनर किलिंग या आत्महत्या को उकसाने का भी हो सकता है।
पुलिस टीम को अगली सुनवाई के दौरान अब तक हुई जांच और आगे की जांच के बारे शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए संकेत भी दिया कि यदि जांच सही नहीं हुई तो पुलिस टीम पर कार्रवाई का निर्देश दिया जा सकता है। पुलिस को पता लगाने के लिए कहा गया कि आखिर युवक युवती ने आत्महत्या क्यों की।
यह है मामला
नरवाना 25 वर्षीय कैलाश शर्मा और रोड़ी की 22 वर्षीय शीनू गोयल के शव 9 जून को फतेहाबाद भुना नहर में मिले थे। इससे पहले शीनू के रिश्तेदार सुशील कुमार ने हाईकोर्ट में शीनू के बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने छह जून को नोटिस जारी कर पुलिस से जवाब मांगा था। इससे पहले पांच जून को शीनू के पिता ने रोड़ी थाने में कैलाश के खिलाफ अपनी बेटी के अपहरण का मामला दर्ज करवाया था।
उधर सात जून को कैलाश के पिता ने भी नरवाना थाने में अपने बेटे की गुमशुदगी की शिकायत दी थी, लेकिन नौ जून को कैलाश और शीनू के शव नहर में मिले थे। शवों के हाथ एक दूसरे से बंधे थे। पुलिस ने इस मामले में आत्महत्या की आशंका जताई है।