बिजली विभाग का निजीकरण करने के निर्णय के खिलाफ शहर के बिजलीकर्मी 72 घंटे के लिए हड़ताल पर गए तो पूरे शहर की बिजली गुल हो गई। स्थिति का संज्ञान लेते हुए अब जस्टिस अजय तिवारी की खंडपीठ ने शहर के चीफ इंजीनियर को तलब कर लिया है। हाईकोर्ट ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए जारी आदेश में कहा कि बिजली की समस्या के कारण केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि बेहद अहम संस्थान जैसे अस्पताल आदि भी प्रभावित हो रहे हैं।
अस्पतालों में मरीज बेहद नाजुक स्थिति में वेंटिलेटर पर पर मौजूद हैं। छात्रों की ऑनलाइन कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। हाईकोर्ट के कई केस में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई बाधित हो रही है क्योंकि कई वकीलों के घर बिजली नहीं है। यह स्थिति बेहद घातक साबित हो सकती है। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनिल मेहता से इस बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि पंजाब और हरियाणा सरकार से संपर्क किया गया था।
पंजाब सरकार ने अधिकारियों को डेपुटेशन पर चंडीगढ़ भेजने में असमर्थता जता दी है और हरियाणा सरकार से अभी कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि बिजली की यह किल्लत हड़ताली कर्मियों की वजह से है। हाईकोर्ट ने इस पर अब बुधवार को चीफ इंजीनियर को हाईकोर्ट में पेश होकर इस मामले का हल निकालने के लिए उठाए कदमों के बारे में जानकारी सौंपने का आदेश दिया है। जस्टिस अजय तिवारी ने अब इस याचिका पर सुनवाई के लिए बेंच निर्धारित करने के लिए इसे मुख्य न्यायधीश के पास भेज दिया है।