चंडीगढ़ मेयर चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन ने चुनाव से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पेश कर दिया। हाईकोर्ट ने इस रिकॉर्ड को देखने के बाद सुनवाई 16 मार्च तक स्थगित कर दी है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने चुनाव से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड सौंपने का आदेश दिया था।
आम आदमी पार्टी की अंजू कत्याल, प्रेम लता व राम चंदर यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को चुनौती दी। याचिका में बताया गया कि चंडीगढ़ नगर निगम के 35 वार्ड के लिए 24 दिसंबर को चुनाव हुआ था। 27 दिसंबर को जारी नतीजे के अनुसार आप को 14, भाजपा को 12 और कांग्रेस को 8 सीटें मिली थीं। कांग्रेस की एक पार्षद बाद में भाजपा में शामिल हो गई थी। इस पार्षद और सांसद का वोट भाजपा को मिला। इस तरह आप और भाजपा दोनों के पास 14-14 वोट हो गए।
आठ जनवरी को मेयर चुनाव करवाया गया। मतदान प्रक्रिया के बाद चुनाव अधिकारी ने आप के एक वोट को अवैध घोषित कर रद्द कर दिया। इसके बाद भाजपा की उम्मीदवार सरबजीत कौर को मेयर घोषित कर दिया गया। आप ने इस पर उस समय भी आपत्ति दर्ज की थी लेकिन लाभ नहीं हुआ। इसके पश्चात याचिका दाखिल कर आप के उम्मीदवारों ने चुनाव रद्द कर मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए दोबारा चुनाव करवाने की हाईकोर्ट से मांग की है।
तकनीकी खामियां बता याचिका पर उठाया सवाल
पिछली सुनवाई पर चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनिल मेहता ने इस याचिका पर कई सवाल उठा दिए थे। उन्होंने कहा कि मेयर पद के लिए चुनाव को चुनौती दी गई है, जबकि इसके नतीजों को चुनौती दी ही नहीं गई। समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों के आधार पर यह याचिका दायर की गई है। दूसरी तकनीकी आपत्ति यह बताई कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को चुनौती दी गई है लेकिन याचिका में चयनित लोगों को पक्ष ही नहीं बनाया गया है। इस तरह इस याचिका में कई तकनीकी खामियां हैं।
नए सिरे से याचिका दाखिल करने का था आदेश
याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि याची इस याचिका को वापस लेकर नए सिरे से दाखिल करे। इस पर याची ने कहा था कि उसे याचिका में संशोधन के लिए कुछ समय दिया जाए। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई स्थगित कर दी थी। चार फरवरी को संशोधित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग व यूटी प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब करते हुए चुनाव का रिकॉर्ड पेश करने का भी आदेश दिया था। मंगलवार को हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप यह रिकॉर्ड कोर्ट में पेश किया गया।