हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आदेश पर रोक लगाते हुए सुनवाई 18 मार्च तक स्थगित कर दी और साथ यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक कोई नया निर्माण न हो यह सुनिश्चित किया जाए। किसी भी निर्माण और मरम्मत के कार्य हेतू हाईकोर्ट की अनुमति अनिवार्य होगी।
यह थी दलील
अर्जी दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि आदेश जारी करते हुए कुछ गलतियां हुई थी। सर्वे ऑफ इंडिया के जिस नक्शे को स्वीकार किया बताया गया है असल में उसे स्वीकार किया ही नहीं गया। इसके अतिरिक्त जिस कमेटी को इसे मंजूर करना था उसने डिमार्केशन के लिए सब कमेटी गठित की थी। साथ ही आरटीआई में सर्वे ऑफ इंडिया ने बताया कि नक्शा तैयार करते हुए किसी एक्सपर्ट एजेंसी की सहायता नहीं ली गई थी।
हजारों की संख्या में हैं नक्शे के अनुसार अवैध निर्माण
सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे के अनुसार सुखना कैचमेंट के इलाके में हजारों की संख्या में मकान आते हैं। यहां तक कि हाईकोर्ट की इमारत का कुछ हिस्सा भी सुखना के कैचमेंट एरिया में आता है। हाईकोर्ट के आदेश से स्थानीय निवासियों को ही नहीं बल्कि हाईकोर्ट की इमारत को भी नुकसान होना था। ऐसे में अब रोक के आदेश से हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिली है।