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Highcourt: चार साल के बेटे की हत्या करने वाली पत्नी पति के प्रति क्रूर, हाईकोर्ट ने माना-पति तलाक का हकदार

Thu, 23 May 2024 09:55 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने चार साल के बच्चे की हत्या कर दी थी। उसे इस मामले में दोषी करार दिया गया था। फैमिली कोर्ट ने आरोपी के पति को तलाक का हकदार माना था, हाईकोर्ट ने भी उस फैसले पर मुहर लगा दी।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रेमी संग मिलकर अपने बेटे की हत्या करने की दोषी महिला को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने पति के प्रति क्रूर करार देते हुए पति को तलाक का हकदार माना है। हाईकोर्ट ने तलाक के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए पत्नी को क्रूर करार देने के फैमिली कोर्ट के आदेश पर मुहर लगा दी है।
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याचिका दाखिल करते हुए पत्नी ने कपूरथला की फैमिली कोर्ट की ओर से सुनाए गए तलाक के आदेश को चुनौती दी थी। याची ने कहा कि उसको चार साल के बेटे की हत्या के लिए दोषी करार देने के आधार पर क्रूर बताकर पति की तलाक की याचिका मंजूर की गई है। याची ने कहा कि उसे दोषी करार देने के आदेश को अपील दाखिल करते हुए चुनौती दी जा चुकी है और अपील अभी लंबित है। ऐसे में अपील लंबित रहते बच्चे की हत्या के आधार पर याची को क्रूर मानकर तलाक का आदेश जारी करना सही नहीं है।

जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस हर्ष बंगर ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध में संलिप्तता, दोषसिद्धि तथा सजा यह जानने के लिए पर्याप्त है कि पत्नी का रवैया पति के प्रति क्रूरता से भरा हुआ था। याची के पति ने पत्नी की अवैध संबंध के बारे में कई दलीलें फैमिली कोर्ट के समक्ष दी थीं, जिसका बहुत अधिक विरोध नहीं किया गया था। याची को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने माना था कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर नाबालिग बच्चे की हत्या की है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने इस तथ्य पर भी विचार किया है कि अपीलकर्ता-पत्नी द्वारा दोषसिद्धि के निर्णय और सजा के आदेश के विरुद्ध दायर अपील लंबित है लेकिन नाबालिग बेटे की हत्या के लिए उसकी दोषसिद्धि के तथ्य ने पति और उनकी नाबालिग बेटी को हुई मानसिक क्रूरता को स्पष्ट रूप से साबित कर दिया। इस वजह से उनसे एक साथ रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती। पत्नी का आचरण प्रतिवादी-पति के प्रति की गई क्रूरता के बारे में बहुत कुछ कहता है। हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट की ओर से दर्ज किए गए निष्कर्ष किसी भी तरह की अवैधता या विकृति से ग्रस्त नहीं हैं। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने पत्नी की फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया है।
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