पंजाब यूनिवर्सिटी को जल्द ही केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिल सकता है क्योंकि पीयू के शिक्षक लंबे समय से इसको लेकर मांग कर रहे थे और सीनेट में भी बहुत बार सीनेटरों की ओर से इस मुद्दे को उठाया जा चुका है। वहीं, पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने को लेकर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार को 30 अगस्त तक अपना पक्ष रखने को कहा है। पीयू प्रशासन का कहना है कि उन्हें भी अभी केंद्र के जवाब का इंतजार है।
पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय ने बताया कि पुटा पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलवाने के मुद्दे को कई बार उठा चुका है। पिछले लगभग छह-सात साल से हम इसकी मांग कर रहे हैं। हमारे मैनिफेस्टो में भी यह शामिल था। यहां तक की पिछले दिनों शिक्षकों की जनरल बॉडी मीटिंग में यह मुद्दा उठा था और शिक्षकों ने इसे हल करवाने को लेकर अपने सुझाव दिए थे।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद चंडीगढ़ के कॉलेजों के शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ मिलेगा और उनकी सेवानिवृत्ति की उम्र भी बढ़कर 65 वर्ष हो जाएगी। ऐसे में पीयू के शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिल पाना गलत है, इसलिए केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग और अधिक बढ़ गई है क्योंकि मौजूदा पंजाब सरकार की ओर से भी शिक्षकों की प्रगति को लेकर कोई अच्छे संकेत नहीं मिल रहे हैं।
पीयू को बजट के लिए पंजाब से नहीं मांगनी पड़ेगी सहायता
पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा अगर मिलता है तो इससे शिक्षकों को कई फायदे होंगे। वहीं यूनिवर्सिटी को बजट के लिए पंजाब सरकार से मांग नहीं करनी पड़ेगी। बजट में भी कई गुना बढ़ोतरी होगी। शिक्षकों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 वर्ष तक हो जाएगी। सभी कर्मचारियों के वेतनमान में भी काफी इजाफा होगा। विद्यार्थियों की फीस भी कम हो सकती है, क्योंकि केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीयू के मुकाबले फीस कम है। हालांकि विद्यार्थियों में दाखिले को लेकर मेरिट बढ़ सकती है।
पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से अभी केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है। केंद्र के जवाब के अनुसार ही यूनिवर्सिटी स्तर पर बाद में कोई चर्चा की जाएगी। - डॉ. यजवेंदर, रजिस्ट्रार, पीयू