पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि कैदी को परिवार के अहम कार्यक्रमों में भाग लेने से वंचित नहीं किया जा सकता। यदि कैदी को इसके लिए पैरोल नहीं देनी है तो संबंधित अधिकारी को इसके लिए ठोस कारण दर्ज करना अनिवार्य है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याची को उसके पिता के भोग में शामिल होने के लिए पैरोल दे दी।
याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी निसान सिंह ने हाईकोर्ट को बताया था कि वह एनडीपीएस के मामले में लुधियाना जेल में बंद है। बीते दिनों उसके पिता की मौत हो गई थी और उसने पिता की अंतिम क्रिया में शामिल होने के लिए पैरोल की मांग की थी। इसे सरकार ने नामंजूर कर दिया था।
हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि कैदी को उसके परिवार के अहम कार्यक्रम में शामिल होने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। यहां तक कि रिश्तेदारों व दोस्तों के कार्यक्रम में शामिल होना भी उसके अधिकारों में शामिल है। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि इस दलील के आधार पर पैरोल आवेदन रद्द करना भी गलत है कि कैदी की गैर मौजूदगी में अन्य लोग मौजूद हैं जो कार्यक्रम को संभाल सकते हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि पैरोल से इन्कार करते हुए संबंधित अधिकारी को इसके लिए ठोस कारण दर्ज करना अनिवार्य है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए याची को पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया है।