-दो महीने से दोष सिद्ध नहीं कर पाने बनती राशि जारी करने के आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक पुलिस अधिकारी की पेंशन रोकने को गैर कानूनी बताया है। हाईकोर्ट ने संस्थागत सुस्ती पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि एक पुलिस अधिकारी को ऐसी आपराधिक एफआईआर के चलते सजा नहीं दी जा सकती, जिसमें चार्जशीट तो दायर हो गई हो, लेकिन दो दशक तक आरोप तय ही न किए गए हों। जस्टिस जगमोहन बंसल ने मोहाली के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को इस मामले में एफआईआर की स्थिति स्पष्ट करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निर्देश दिए हैं। जस्टिस बंसल ने कहा कि यह देरी या तो पुलिस अधिकारियों, लोक अभियोजक या न्यायालय के कर्मचारियों की लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने 2018 से लंबित सेवानिवृत्ति लाभ, पेंशन और ग्रेच्युटी को तुरंत जारी करने का निर्देश दिया, जिन्हें एफआईआर के चलते रोक दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ता जुलाई 2018 में सेवानिवृत्त हो चुका है और केवल एफआईआर लंबित होने के कारण उसका भुगतान रोका जाना अनुचित है।
यह आदेश रिटायर्ड पुलिस अधिकारी इंद्रजीत सिंह की याचिका पर दिया गया, जिसमें उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति की राशि जारी करने की मांग की थी। उनके वकील ने तर्क दिया कि इंद्रजीत सिंह को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के एक मामले में पहले ही बरी किया जा चुका है, जो जून 2004 में दर्ज हुआ था, लेकिन दूसरी एफआईआर जो पंजाब आबकारी अधिनियम के तहत उसी महीने दर्ज हुई थी, के चलते उनकी सेवानिवृत्ति राशि रोकी गई है। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस एफआईआर में चालान 8 फरवरी 2005 को ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया था और तब से 20 साल बीत चुके हैं।
पुलिस विभाग ने खुद ही इस मामले को एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट को कंपाउंडिंग के लिए भेजा था, लेकिन विभाग ने स्पष्ट किया कि केस कभी कंपाउंड नहीं हुआ। कोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य को कई बार मौका दिया गया कि वह एफआईआर की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करे, लेकिन अब तक वे ट्रायल कोर्ट से कोई पुख्ता रिकॉर्ड लाने में असफल रहे हैं। केवल चालान की एक फोटो कॉपी ही उनके पास उपलब्ध है। कोर्ट ने लंबित सेवानिवृत्ति राशि को रोके रखने को अनुचित और कानून विहीन करार देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बकाया राशि तुरंत जारी की जाए। साथ ही विभाग को दो महीने का समय दिया गया है कि वे यह साबित कर सकें कि याचिकाकर्ता दोषी है। यदि दो महीने के भीतर दोष सिद्ध होता है, तो सेवानिवृत्ति लाभों की स्थिति कानून के अनुसार दोबारा तय की जाएगी।