किसानों को ट्यूबवेल्स के लिए बिजली सब्सिडी उपलब्ध करवाने के फैसले पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि या तो सब्सिडी बंद की जाए या क्रीमी लेयर निर्धारित कर इसके दायरे में आने वालों से सब्सिडी का लाभ वापस लिया जाए। अब हाईकोर्ट ने पंजाब व हरियाणा सरकार से सब्सिडी को लेकर उनका पक्ष स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं।
एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए पंजाब के बड़े किसानों को दी जा रही बिजली सब्सिडी का मामला उठाया था। याची ने कहा 2016-17 में सरकार को सब्सिडी पर दी जा रही बिजली के लिए पीएसपीसीएल को 6113 करोड़ का भुगतान करना पड़ा था। याची ने कहा कि सब्सिडी की जरूरत गरीब किसानों को है जबकि वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्री, पूर्व मंत्री, आईएएस और आईपीएस भी सब्सिडी का लाभ ले रहे हैं।
ऐसे में अमीर किसानों को सब्सिडी तत्काल प्रभाव से बंद की जानी चाहिए। एक ओर सरकार अपने वित्तीय संकट का रोना रो रही है और अपने कर्मियों तक को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है और दूसरी ओर खुद मंत्री, नेता और बड़े-बड़े अधिकारी अपने खेतों में मुफ्त में बिजली इस्तेमाल कर रहे हैं।
स्वेच्छा पर नहीं छोड़ सकते सब्सिडी
इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा कि ट्यूबवेल के लिए मुफ्त बिजली की योजना में अमीर और गरीब का कोई फर्क नहीं रखा गया है। बावजूद इसके पीएसपीसीएल ने 23 फरवरी को एक सर्कुलर जारी कर दिया है, जिसके अनुसार अगर कोई किसान इस सब्सिडी को छोड़ना चाहता है तो वो छोड़ सकता है।
इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इसे स्वेच्छा पर नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि या तो मुफ्त सब्सिडी खत्म करने पर विचार किया जाए या फिर एक क्रीमीलेयर निर्धारित कर अमीर किसानों को मुफ्त बिजली का लाभ न दिया जाए। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर हरियाणा व पंजाब को स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं।