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Chandigarh News: हाईकोर्ट ने पलटा फैसला, पदोन्नत जेएलटी होंगे डिमोट, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे लैब टेक्नीशियन

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चंडीगढ़। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 में 1995 में भर्ती हुए 34 लैब टेक्नीशियनों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अब हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के जूनियर लैब टेक्नीशियन एनेस्थीसिया व सामान्य जूनियर लैब टेक्नीशियनों के प्रमोट करने के आदेश को रद्द कर दिया है। इस आदेश के बाद प्रमोट हुए जूनियर लैब टेक्नीशियन (जेएलटी) डिमोट हो गए हैं। वहीं, इस मामले में कैट में याचिका दायर करने वाले अनिल सिन्हा व अन्य ने कहा कि हाईकोर्ट ने पक्ष रखने के लिए भी नहीं बुलाया। इससे उन्हें एरियर भी लौटाना पड़ सकता है। अब जूनियर लैब टेक्नीशियन हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
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जीएमसीएच-32 में जूनियर लैब टेक्नीशियन एनेस्थीसिया के पद पर वर्ष 1995 में नियमित भर्ती हुई थी। इसमें भर्ती कर्मचारियों को नियमानुसार वर्ष 2001 में प्रमोशन मिलनी थी लेकिन उन्हें प्रमोट न कर वर्ष 2004 में तीन जूनियर्स को प्रमोट कर दिया गया। इसे लेकर साल 2012 में पहले से भर्ती कर्मियों ने यूटी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ कैट में याचिका दायर कर दी। कैट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया और यूटी प्रशासन को प्रमोट करने के साथ सभी लाभ देने के आदेश दिए। इसके बाद जेएलटी अनिल सिन्हा व अन्य भी प्रमोशन के लिए कैट पहुंच गए। कैट ने इन्हें भी प्रमोट करने के आदेश दिए।

2017 में हाईकोर्ट ने भी दिया था प्रमोट करने का आदेश
यूटी प्रशासन कैट के फैसले के खिलाफ वर्ष 2014 में हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट ने अनिल सिन्हा व अन्य और साल 1995 में भर्ती जेएलटी एनेस्थीसिया के पक्ष में दिए फैसले पर दायर प्रशासन की चार याचिकाओं को क्लब करते हुए एक कर दिया। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने वर्ष 2017 में कैट के आदेशों को बरकरार रखते हुए जेएलटी को प्रमोट करने के आदेश दिए। हाईकोर्ट के आदेशानुसार यूटी प्रशासन ने जेएलटी एनेस्थीसिया व सामान्य जेएलटी को वर्ष 2004 से 2017 में प्रमोट कर उन्हें 18-18 लाख रुपये एरियर देने के आदेश दिए। टैक्स की कटौती कर कर्मियों को 13-13 लाख रुपये एरियर भी मिला।
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डिमोट के साथ लौटाना पड़ सकता है एरियर
जेएलटी का कहना है कि हाईकोर्ट ने अनिल सिन्हा व अन्य के खिलाफ यूटी प्रशासन की ओर से दायर याचिका में उन्हें नोटिस तक नहीं दिया। उन्हें अदालत में प्रमोशन के खिलाफ अपना पक्ष रखने के लिए एक बार भी नहीं बुलाया गया। उन्हें प्रमोट करने के फैसले को ही खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अब वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
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