कहा-दोबारा ऐसा हलफनामा लिया गया तो न्यायालय की अवमानना के तहत की जाएगी कार्रवाई
-2005 में रिटायर कर्मी को देरी से जारी राशि के लिए 6 प्रतिशत ब्याज जारी करने का हैफेड को आदेश
-इस प्रकार का हलफनामा दाखिल करने के लिए मजबूर करने पर कर्मी को 50 हजार मुआवजा देने का हैफेड को आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि कोर्ट केस वापस लेने व ब्याज का दावा न करने जैसा हलफनामा कर्मचारी से नियोक्ता नहीं ले सकता है। इस प्रकार के हलफनामे की कोई कानूनी वैधता नहीं है और यदि ऐसा हलफनामा लिया गया तो न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने यह आदेश 2005 में हैफेड से रिटायर कर्मचारी को लंबित राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज जारी करने का निर्देश देते हुए जारी किया है।
याचिका दाखिल करते हुए कैथल निवासी बनारसी दास ने हाईकोर्ट को बताया कि 2005 में उसे अनिवार्य रिटायरमेंट दे दी गई थी। उस पर रिकवरी डाली गई थी और पेंशन व अन्य लाभ रोक लिए गए थे। रिकवरी को लेकर 2023 में कार्रवाई समाप्त करने का निर्णय लिया गया था और याची को पेंशन व अन्य लाभ जारी कर दिए गए थे। याची की इन लाभ को लेकर याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन थी और ऐसे मेंं उसे यह लाभ जारी करते हुए अंडरटेकिंग ली गई थी कि वह याचिका वापस लेगा और ब्याज का दावा नहीं करेगा। हाईकोर्ट ने इस रवैये पर हैफेड की आलोचना करते हुए कहा कि कर्मचारी से इस प्रकार की अंडरटेकिंग नियोक्ता नहीं ले सकता। इस प्रकार की अंडरटेकिंग की कानून में कोई वैधता नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट ने हैफेड को आदेश दिया कि याची को रोकी गई राशि पर तीन माह के भीतर 6 प्रतिशत ब्याज का भुगतान करे। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही आदेश दिया कि अब किसी भी कर्मचारी से इस प्रकार की अंडरटेकिंग नहीं ली जाएगी और यदि ऐसा किया गया तो संबंधित अधिकारी न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई के लिए तैयार रहे। याची को यह अंडरटेकिंग देने के लिए मजबूर करने पर हाईकोर्ट ने हैफेड को आदेश दिया है कि याची को मुआवजे के तौर पर 50 हजार रुपये का भुगतान किया जाए।