पुलिस कर्मियों व अधिकारियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी मकान की अलॉटमेंट मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर लगाए गए जुर्माने को माफ करने के लिए दाखिल अर्जी को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में कहा कि अगर आज ही जुर्माने के 10 हजार रुपये जमा नहीं करवाए गए तो 50 हजार जमा करवाने को तैयार रहें। साथ ही प्रशासन से पूछा है कि पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी का क्या समय है और स्पेशल ड्यूटी क्या है जिसे आधार बनाकर आउट ऑफ टर्न हाउस अलॉटमेंट की जाती है।
अरविंद कुमार व अन्य ने सीनियर एडवोकेट आशीष चोपड़ा और एडवोकेट गगनदीप सिंह के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए आउट ऑफ टर्न अलॉट किए गए सरकारी मकानों की अलॉटमेंट रद्द करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से पूछा था कि शहर में चंडीगढ़ पुलिस के मुलाजिमों के लिए कुल कितने सरकारी मकान हैं। इनको आउट ऑफ टर्न अलॉट करने के लिए क्या कोई वरिष्ठता सूची तैयार की गई है। अगर सूची तैयार की गई है तो इस तरह की अब तक कितनी अलॉटमेंट प्रशासन की ओर से की गई हैं।
पिछली सुनवाई पर प्रशासन इस मामले में जवाब दाखिल करने में नाकाम रहा और मोहलत देने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि बिना किसी स्पष्टीकरण के प्रशासन बार-बार समय मांग रहा है और आदेश का पालन नहीं कर रहा है। हाईकोर्ट ने प्रशासन को आखिरी मौका देते हुए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। सोमवार को जुर्माने की राशि को माफ करने की अपील करते हुए अर्जी दाखिल की गई थी और हाईकोर्ट की जानकारी हलफनामे के माध्यम से सौंपी गई।
हाईकोर्ट को बताया गया कि आउट ऑफ टर्न हाउस अलॉटमेंट विषम परिस्थितियों और जनहित दो तरह की स्थिति में दी जाती है। जनहित में सरकार इसके लिए सिफारिश करती है। हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज करते हुए जुर्माना राशि सोमवार को ही जमा करवाने वरना 50 हजार के जुर्माने के लिए तैयार रहने को कहा। साथ ही पूछा है कि पुलिसकर्मियों के काम का क्या समय है और स्पेशल ड्यूटी को लेकर क्या परिभाषा है।