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Chandigarh News: ग्रीन क्रैकर्स के बिक्री लाइसेंस सीमित करने में हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इन्कार

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ग्रीन क्रैकर्स के बिक्री लाइसेंस सीमित करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा इस समय ग्रीन क्रैकर्स के लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
सुनवाई के दौरान स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यवसाय को सीमित किया जा सकता है लेकिन पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि नीति संबंधी मामलों में न्यायालय का हस्तक्षेप की संभावना बेहद सीमित होती है। कोर्ट ने पंजाब सरकार से अस्थायी लाइसेंस की संख्या 2016 में जारी लाइसेंस का केवल 20 प्रतिशत तक रखने पर जवाब दायर करने का भी आदेश दिया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अस्थायी लाइसेंस जितने कम होंगे शहर के लिए उतना ही अच्छा होगा और प्रदूषण कम होगा।
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चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ जालंधर फायरवर्क्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में यह दलील दी गई कि ग्रीन क्रैकर्स की बिक्री पर लगाई गई सीमा पाबंदी उनके संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत प्रदत्त व्यवसाय करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
2017 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण के मद्देनजर एक अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके तहत पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिए गए थे कि वे पिछले वर्ष 2016 में जारी अस्थायी लाइसेंस की संख्या के केवल 20 प्रतिशत तक ही नए अस्थायी लाइसेंस जारी करें। आदेश में यह भी कहा गया था कि इन लाइसेंस का वितरण ड्राॅ ऑफ लॉट्स (लॉटरी प्रणाली) के माध्यम से किया जाए। यह प्रक्रिया संबंधित उपायुक्त (डीसी) स्वयं करें, किसी अन्य अधिकारी को यह अधिकार नहीं सौंपा जा सकता।
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जालंधर फायरवर्क्स एसोसिएशन की ओर से अदालत को बताया गया कि 2016 के आधार पर तय की गई 20% की सीमा अब पुरानी हो चुकी है। उस समय की जनसंख्या और वर्तमान स्थिति में बड़ा अंतर है, इसलिए 2016 के आंकड़ों पर आधारित यह सीमा अब न्यायसंगत नहीं रह गई है।
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