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हाईकोर्ट ने जल विवाद संबंधी केसों का रिकार्ड किया तलब, 10 सितंबर को अगली सुनवाई

Sat, 07 Jul 2018 09:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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पंजाब के पानी की बीते 71 साल से रुकी हुई रायल्टी जारी करने की मांग संबंधी सांसद धर्मवीर गांधी की याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से उन सभी याचिकाओं का ब्योरा तलब कर लिया है, जो इसी मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
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शुक्रवार को सांसद की याचिका पर सुनवाई को दौरान पंजाब सरकार के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने हाईकोर्ट को बताया कि पानी पर विवाद के कई मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। एजी ने हाई कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले में हरियाणा, हिमाचल व राजस्थान को भी नोटिस जारी किया जाए। इस पर हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया कि वह सितंबर माह में इस मामले की अगली सुनवाई से पहले जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे सभी मामलों की जानकारी हाईकोर्ट को उपलब्ध कराए।

याचिका में पंजाब के पटियाला से आम आदमी पार्टी के सांसद धर्मवीर  गांधी व अन्य ने  सतलुज, रावी और ब्यास नदियों से पंजाब के हिस्से का पानी हरियाणा, राजस्थान व हिमाचल को दिए जाने का विरोध करते हुए केंद्र सरकार की 29 जनवरी, 1955 की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत पानी के बंटवारे का निर्णय लिया गया था। याचिका में कहा गया कि 1955 में केंद्र सरकार ने राजस्थान को इस प्रोजैक्ट में इसलिए शामिल किया था ताकि वह विश्व बैंक से कर्ज ले सके। तब केंद्र ने पंजाब को भरोसा दिया था कि राजस्थान द्वारा पंजाब को मुआवजा दिया जाएगा।
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याचिका में कहा गया है कि अधिसूचना के क्लाज पांच को लागू नहीं किए जाने के कारण 1947 से अब तक राजस्थान और गैर रिपेरियन राज्यों को दिए गए पानी के एवज में पंजाब को 80000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि हिमाचल हरियाणा राजस्थान को बिना किसी कारण के यह पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है जबकि यह पानी पंजाब के हिस्से का है। इन राज्यों को पानी देने के कारण पंजाब में अकाल की स्थिति पैदा हो गई है और आने वाला पंजाब सूखा पंजाब होने की कगार पर है। याचिका में मांग की गई कि पंजाब के हिस्से के पानी के बदले उसे 2 पैसे प्रति लीटर मुआवजा दिया जाए।
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