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Highcourt: 11 साल से लटकी पांच आपराधिक मामलों की जांच, हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, पुडा और गमाडा को लगाई फटकार

Tue, 02 Apr 2024 03:27 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पुडा/गमाडा के अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया में बाधा डालने का हर संभव प्रयास किया है और जाहिर तौर पर यह इन मामलों में आरोपियों के प्रभाव में आकर किया गया है। ऐसे ही कई मामलों में जांच में अनुचित रूप से देरी हुई है क्योंकि बार-बार आवेदन के बावजूद पुडा/गमाडा से रिपोर्ट/मंजूरी नहीं मिली।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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विस्तार
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पुडा और गमाडा की ओर से अभियोजन की मंजूरी व रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने में हुई देरी के चलते पांच आपराधिक मामलों की जांच 11 साल लटकने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हैरानी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों के प्रभाव में आकर जांच प्रभावित करने के लिए पुडा और गमाडा के अधिकारियों ने हर संभव प्रयास किया है। हाईकोर्ट ने दोनों को फटकार लगाते हुए कहा कि हमारे संज्ञान में आया है कि कई आपराधिक मामलों में जांच पुडा और गमाडा की ओर से हुई देरी के कारण अनावश्यक रूप से लटकी है।
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फतेहगढ़ साहिब के पीयूष बंसल ने 2017 में दर्ज आईपीसी की धारा 279, 304-ए के तहत दर्ज एक मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी या पुलिस अधीक्षक रैंक के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। याची ने बताया कि उसे आपराधिक मामले में फंसाया जा रहा है और 5 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है। कोर्ट ने पाया कि मामला सात साल पुराना है और अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। ऐसे में फतेहगढ़ के एसएसपी से जवाब मांगा था। एसएसपी ने बताया था कि पांच ऐसे आपराधिक मामले हैं जिसमें पुडा व गमाडा की मंजूरी के अभाव में जांच 11 साल से लंबित है।

एसएसपी की ओर से दाखिल हलफनामे को देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पुडा/गमाडा के अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया में बाधा डालने का हर संभव प्रयास किया है और जाहिर तौर पर यह इन मामलों में आरोपियों के प्रभाव में आकर किया गया है। ऐसे ही कई मामलों में जांच में अनुचित रूप से देरी हुई है क्योंकि बार-बार आवेदन के बावजूद पुडा/गमाडा से रिपोर्ट/मंजूरी नहीं मिली।
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पुडा और गमाडा से मांगी यह जानकारी
1. पुलिस से रिपोर्ट/मंजूरी के लिए आवेदन आने की तिथि, एफआईआर संख्या, धारा, पुलिस स्टेशन व एफआईआर का विवरण
2. उस अधिकारी का नाम, जिसे आवेदन प्राप्त हुआ
3. उस अधिकारी का नाम, जिसने उन फाइलों को डील किया
4. ऐसे हर मामले में रिपोर्ट या मंजूरी की तिथि
5. पुलिस को रिकॉर्ड या मंजूरी देने में देरी का कारण
6. प्रत्येक मामले में रिपोर्ट/मंजूरी में देरी करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई
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