सूखे पेड़ की टहनी के गिरने से 70 प्रतिशत विकलांग हुई काजल को बड़ी राहत देते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर निगम चंडीगढ़ को 15-60 लाख रुपये के बीच मुआवजा तय करने का आदेश दिया है। मुआवजे का आंकलन मोटर व्हीकल एक्ट की तर्ज पर होगा जिसमें जीवन के हर पहलू के नुकसान का आंकलन करने का प्रावधान है और उसी के अनुरूप मुआवजा निर्धारित होता है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने कहा था कि चंडीगढ़ प्रशासन व नगर निगम नागरिकों के प्रति अपने कर्तव्य को लेकर गंभीर नही हैं। अधिकारियों की अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। 20 साल की काजल भी ऐसे ही नागरिकों में से एक है, जिसे अधिकारियों की गलती के कारण अपनी टांग गंवानी पड़ी। इसकी जिम्मेदारी लापरवाह अफसरों की बनती है और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
यह है मामला
चंडीगढ़ प्रशासन की लापरवाही के चलते सेक्टर 17 में एक सूखा पेड़ समय पर नहीं काटा गया। 15 सितंबर 2013 को काजल नामक एक 20 वर्षीय युवती पर उसकी टहनी गिरी और युवती गंभीर रूप से घायल हो गई थी। बाद में गहरे जख्म के चलते उसे अपना एक पैर गंवाना पड़ा था। याचिकाकर्ता के वकील संदीप वर्मा ने कोर्ट से मांग की थी कि युवती लगभग 75 प्रतिशत अपंग हो गई है। ऐसे में उसे कुशल कारीगर मानकर उसे मोटर एक्सीडेंट क्लेम के तहत मुआवजा दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने अब याचिका का निपटारा करते हुए प्रशासन को आदेश दिया है कि युवती की भविष्य की आय, उसकी पीड़ा, जीवन का जो सुख वह सही रहते ले सकती थी उसे खोने का नुकसान और जीवन व आय के हर पहलू के लिए मुआवजे का आंकलन किया जाए। आंकलन करने के बाद उसे इस मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए। हालांकि अंतरिम राहत के तौर पर जारी की गई मुआवजे की राशि को काटकर उस राशि का भुगतान किया जाएगा।