यमुनानगर के पूर्व विधायक दिलबाग सिंह की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार व प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याची ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार करने और अदालत के रिमांड आदेश को रद्द करने की गुहार लगाई है और इन दोनों को कानून व न्याय के खिलाफ बताते हुए तुरंत रिहा करने का निर्देश जारी करने की अपील की है।
मंगलवार को जब मामला हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचा तो जस्टिस विकास बहल ने कहा था कि यह मामला किसी और बेंच के समक्ष सूचीबद्ध होना चाहिए था। याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी और रिमांड आदेश को रद्द करने की मांग की है। वर्तमान याचिका कई अन्य याचिकाओं के समान है जिसमें धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में इस तरह की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता पूर्व विधायक है, वर्तमान/पूर्व सांसद/विधायकों द्वारा या उनके विरुद्ध सभी आपराधिक मामलों की सुनवाई का रोस्टर हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच को सौंपा गया है। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की हाईकोर्ट की एक अन्य डिविजन बेंच सुनवाई करती आई है और उस पर फैसले भी किए है। ऐसे में हाईकोर्ट की रजिस्ट्री इस मामले को देखे और उचित बेंच के सामने इस मामले को सूचीबद्ध करे। इसके बाद याचिका फिर से जस्टिस विकास बहल की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दी गई।
दिलबाग सिंह को प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले सप्ताह गिरफ्तार कर लिया था। हरियाणा के अलग-अलग ठिकाने में चार जनवरी की सुबह प्रवर्तन निदेशालय की अलग-अलग टीमों ने करनाल, सोनीपत और यमुनानगर में दबिश दी थी।
यमुनानगर में पूर्व विधायक दिलबाग सिंह के घर पांच दिन चली प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई दिलबाग सिंह की गिरफ्तारी के साथ खत्म हुई थी। उनके आवास से प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी उन्हें गाड़ी में बैठाकर दिल्ली ले गए थे। इनेलो के नेता और पूर्व विधायक दिलबाग सिंह और उनके सहयोगी के घर से पांच करोड़ रुपये कैश, चार विदेशी निर्मित हथियार, 100 से अधिक शराब की बोतलें और 4-5 किलोग्राम सोना बरामद हुआ था। वह 2009 में पहली बार इनेलो से विधायक बने थे।