सीनेट चुनाव जल्द करवाने की मांग वाली याचिका पर जवाब दाखिल न करना पंजाब विश्वविद्यालय को भारी पड़ गया। हाईकोर्ट ने पंजाब विश्वविद्यालय पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह राशि शुक्रवार को ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करवाने का आदेश दिया है। हालांकि यह राशि चंडीगढ़ प्रशासन, पंजाब सरकार, केंद्र सरकार और पीयू प्रशासन को मिलकर जमा करनी है।
पंजाब विश्वविद्यालय के सीनेटर प्रो केशव मल्होत्रा सहित अन्य सीनेटरों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया था कि सीनेट का कार्यकाल खत्म हो चूका है। पंजाब विश्वविद्यालय ने नवंबर 2019 में सीनेट चुनाव का कार्यक्रम जारी किया था। जून में चुनावी स्टाफ की नियुक्ति का नोटिस भी जारी कर दिया गया था।
जुलाई में कुछ सीनेटरों ने कोरोना के चलते चुनाव कार्यक्रम में बदलाव की मांग की थी। अगस्त में चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल ने उस समय चुनाव न करवाने की राय दी थी। इसके बाद 15 अगस्त को वीसी ने सीनेट के चुनाव दो महोने के लिए और फिर 17 अक्तूबर को चुनाव अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने का आदेश जारी कर दिया।
इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई और जल्द से जल्द से चुनाव करवाने की मांग की गई है। पिछली सुनवाई पर पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा जवाब दायर नहीं करने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाब का अंतिम अवसर दिया था और कहा था कि यदि 15 जनवरी की सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो पंजाब विश्वविद्यालय पर जुर्माना लगाया जाएगा।
शुक्रवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही पंजाब विश्वविद्यालय ने बताया कि जवाब तैयार कर लिया गया है और आज ही इसे रजिस्ट्री में जमा करवा दिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जवाब रजिस्ट्री में जमा करवाने से पहले पंजाब विश्वविद्यालय को 50 हजार रुपये जुर्माना जमा करवाना होगा।