डॉक्टरों के रिक्त पदों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पीजीआई पर पूरे उत्तर भारत का बोझ है और अगर पद इस प्रकार से रिक्त रहेंगे तो यह संस्थान की प्रभावशीलता को घटा देगा। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने पीजीआई चंडीगढ़ को 30 सितंबर 2024 तक की मोहलत देते हुए रिक्त पदों को भरने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने रिक्त पदों पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। पिछली सुनवाई पर पीजीआई ने हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंपते हुए बताया था कि संस्थान में न सिर्फ चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा बल्कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश तक से मरीज इलाज को आते हैं। ऐसे में पीजीआई चंडीगढ़ पर मरीजों का बोझ काफी बढ़ गया है। हाईकोर्ट ने पीजीआई चंडीगढ़ से डॉक्टरों व शिक्षकों के रिक्त पदों की वर्तमान स्थिति के बारे में स्टेटस रिपोर्ट तलब कर ली थी।
अब पीजीआई ने जवाब दाखिल करते हुए बताया कि डॉक्टरों के 732 में से 167 पद रिक्त हैं। फरवरी में ही असिस्टेंट प्रोफेसर के 124 पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। इसके साथ ही यह भी बताया कि प्रोफेसर के 70 पदों में से 29 पदों भरे हुए हैं और 41 रिक्त हैं। इन पदों को भरने के लिए इन्हें डाउन ग्रेड करके असिस्टेंट प्रोफेसर में तब्दील करने का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में रखा गया था लेकिन मंजूर नहीं हो सका। फिलहाल इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पीजीआई इन पदों को भरने के लिए कदम उठा रहा है और नियुक्ति प्रक्रिया में अभी समय लगेगा। पीजीआई पर उत्तर भारत का बोझ है और ऐसे में पूरी शक्ति से काम करने के लिए सभी पदों का भरना जरूरी है।