चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए आठ जनवरी को हुए निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया है। हालांकि याचिका पर विस्तृत फैसला आना बाकी है। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद के लिए चुनाव के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) की अंजू कत्याल सहित अन्य दो पार्षदों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
कोर्ट को बताया गया था कि चंडीगढ़ नगर निगम के 35 वार्ड के लिए 24 दिसंबर को चुनाव हुए थे और आम आदमी पार्टी सबसे बड़े दल के तौर पर सामने आई थी। आप को 14, भाजपा को 12 और कांग्रेस को 8 सीटें मिली थी। बाद में कांग्रेस की एक पार्षद भाजपा में शामिल हो गई थी और एक वोट सांसद की भाजपा के खाते में पहले से ही थी। इस तरह दोनों दलों के 14-14 वोट हो गए थे। इसके बाद मेयर पद के लिए चुनाव होने थे जोकि आठ जनवरी को करवाए गए।
मतदान प्रक्रिया के बाद चुनाव अधिकारी ने आम आदमी पार्टी के एक वोट को अवैध करार दे रद्द कर दिया। इस तरह भाजपा की उम्मीदवार सरबजीत कौर को मेयर पद पर विजयी घोषित कर दिया। इसी चुनाव को आप के उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इसे रद्द कर नए सिरे से इन पदों पर चुनाव करवाने की मांग की थी।
याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन ने सवाल उठाते हुए कहा था कि यह याचिका वैध नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनिल मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जो रिप्रेजेंटेशन दी है वह उनकी वास्तविक रिप्रेजेंटेशन नहीं है। पहले दी गई रिप्रेजेंटेशन सिर्फ अंजू कत्याल की थी जबकि याचिका में दी गई रिप्रेजेंटेशन तीनों प्रत्याशियों की है। साथ ही जो रिप्रजेंटेशन दी गई थी उसमें फटे हुए मतपत्रों को लेकर आपत्ति थी लेकिन याचिका में इसका जिक्र ही नहीं है।
याचिका में मार्क किए मतपत्रों के बारे में कहा गया है। याचिकाकर्ताओं ने तब जो आपत्तियां दर्ज की थी, उनका निपटारा कर दिया गया था। ऐसे में निपटारा किए जाने के आदेश को ही चुनौती दी जा सकती थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 31 अक्तूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने इस याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया है।