नौ साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी की सजा के खिलाफ अपील को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बच्चों से दुष्कर्म मनुष्यता के प्रति अपराध है और ऐसा करने वाला रहम का बिल्कुल हकदार नहीं है। याची पर नौ साल की बच्ची से दुष्कर्म और इसके बाद हत्या का आरोप था।
पलवल की ट्रायल कोर्ट ने सबूतों, दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर याची को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सजा सुनाई थी। सजा के फैसले को दोषी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा कि ऐसे अपराधी विकृत मानसिकता के होते हैं, जो यौन सुख के लिए मासूम बच्चों तक को अपनी हवस का शिकार बना लेते हैं। इससे घृणित और नीच अपराध क्या हो सकता है।
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कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ सर्वे के अनुसार ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जो चिंता का विषय है। बच्चों को विशेष देखभाल और सुरक्षा की जरूरत होती है। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे न सिर्फ देश का भविष्य होते हैं बल्कि वह देश को आगे ले जाने के लिए प्राकृतिक संसाधन भी हैं।
हमारे देश में बच्चियों की हालत बहुत नाजुक है। यौन शोषण के अलावा भावनात्मक और वित्तीय शोषण की भी वह शिकार होती हैं। अदालतों को पीड़िताओं के मामले में अलग दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने दोषी की सजा के खिलाफ अपील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसे दोषी रहम के हकदार नहीं है।
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