याची ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार याची से दुष्कर्म की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि समझौता होने से पहले याची आरोपी के साथ सहमति संबंध में रह रही थी। विवाद आरंभ होने के बाद पुलिस को शिकायत दी गई थी और ऐसे में यह पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
सहमति संबंध में रहने के बाद विवाद होने पर दुष्कर्म की शिकायत को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए रोहतक की ट्रायल कोर्ट द्वारा मामला रद्द करने के आदेश को सही करार देते हुए अपनी मुहर लगा दी।
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युवती ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि आरोपी ने उसे शादी का झांसा दिया और उससे दुष्कर्म किया। इसके बाद पंचायत में समझौता हुआ तो दिखावे के नाम पर शादी रचाई गई और याची को विश्वास दिलाया कि उसे कनाडा लेकर जाएगा। वायदे के बावजूद न तो वह याची के साथ रहा और न ही उसे विदेश लेकर गया।
याची ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार याची से दुष्कर्म की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि समझौता होने से पहले याची आरोपी के साथ सहमति संबंध में रह रही थी। विवाद आरंभ होने के बाद पुलिस को शिकायत दी गई थी और ऐसे में यह पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। दुष्कर्म का मामला बेहद गंभीर होता है और इसके आरोपी को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। किसी व्यक्ति को बदला लेने के लिए इस प्रकार से मामला दर्ज करवाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने तथ्यों को समझने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कोई गलती नहीं की है। ट्रायल कोर्ट का मानना बिलकुल सही है कि इस मामले में दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप की पुष्टि नहीं होती है क्योंकि युवती आरोपी के साथ सहमति संबंध में रह रही थी।