पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि जब किसी व्यक्ति को अदालत निर्दोष घोषित कर देती है तो उस पर लगे आरोपों की छाया हमेशा के लिए उसका पीछा करे, यह ठीक नहीं है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि याची का नाम अपने रिकार्ड से हटा दे।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि याची एक अनुभवी कार्पोरेट पेशेवर हैं, जिनका करियर भारत और अमेरिका में 20 वर्षों से अधिक का है। उसने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। उनके खिलाफ जो मामला दर्ज किया गया था, उसमें विवादित राशि मात्र 3,000 रुपये थी और अदालत ने इस मामले को पहले ही खारिज कर दिया था।
कई मल्टीनेशनल कंपनियों में साक्षात्कार पास करने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिल रही है, क्योंकि उसके नाम की जानकारी ई-कोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध है और उसे आरोपी माना जा रहा है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि वह अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में अवसर तलाश रहे हैं, लेकिन ई-कोर्ट पोर्टल पर उनका नाम होने के कारण उन्हें नौकरी मिलने में बाधाएं आ रही हैं।
हाईकोर्ट ने माना कि यह व्यक्ति के निजता और भूलाए जाने के अधिकार का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि गुरुग्राम जिला अदालत तथा हाईकोर्ट की रजिस्ट्री सहित सभी संबंधित रिकॉर्ड से याची का नाम हटाया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि भविष्य में जब याचिकाकर्ता किसी अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म या सर्च इंजन से अपने नाम को हटाने के लिए संपर्क करें, तो उनसे भी यह अपेक्षा की जाएगी कि वे याचिकाकर्ता की निजता का सम्मान करें और इस मामले से जुड़े किसी भी रिकार्ड को हटाने में सहयोग करें।