पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एनडीपीएस के मामले में सजा के निलंबन से दोषसिद्धि समाप्त नहीं होती है और यह नहीं कहा जा सकता है कि जमानत मांगने वाले आरोपी की साख साफ है।
याचिका दाखिल करते हुए कपूरथला निवासी जस्टिस ने एनडीपीएस के मामले में जमानत की मांग की थी। हाईकोर्ट ने जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के तहत दोहरी शर्तें पूरी नहीं की गई हैं। धारा 37 में कहा गया है कि किसी आरोपी को तब तक जमानत नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि आरोपी दोहरी शर्तों को पूरा करने में सक्षम न हो, यानी यह मानने के लिए उचित आधार कि आरोपी ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और यह कि आरोपी कोई अपराध नहीं करेगा या जमानत मिलने पर उसके अपराध करने की संभावना नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को पहले भी एनडीपीएस अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था और उसकी सजा निलंबित कर दी गई है, लेकिन इससे दोषसिद्धि समाप्त नहीं होगी। इस प्रकार, याचिकाकर्ता की साख को साफ नहीं कहा जा सकता। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सह-आरोपी अजीत कुमार और रूपेश कुमार से 500 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी और सह-आरोपी अजीत कुमार के खुलासे पर याचिकाकर्ता को एफआईआर में नामित किया गया था। याचिकाकर्ता पहले से ही किसी अन्य मामले में हिरासत में था और उसे वर्तमान मामले में फंसाया गया है। जमानत का विरोध करते हुए पंजाब सरकार ने कहा कि याची एक रैकेट का सदस्य है, जो जेल के अंदर संचालित होता है और ड्रग्स की आपूर्ति करता है।