पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने कई साल बीत जाने के बावजूद कर्मचारियों के लिए मकान बनाने का काम शुरू न कर पाने पर चंडीगढ़ प्रशासन और हाउसिंग बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि हवा हवाई बातें न की जाएं और अगली सुनवाई पर हलफनामे के माध्यम से इसकी पूरी जानकारी दी जाए।
वीरवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही चंडीगढ़ प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने बाकी की 61.5 एकड़ भूमि को हाऊसिंग बोर्ड को सौंपने के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेज रखा है। केंद्र ने उस पर अभी निर्णय नहीं लिया है। इस मामले में केंद्र की तरफ से बताया गया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल इस स्कीम को मंजूरी देगा, इसलिए केंद्र सरकार को इस बाबत समय दिया जाए।
हाईकोर्ट ने केंद्र को समय देते हुए इस पर जल्दी निर्णय लेकर जवाब देने का आदेश दिया। इसी के साथ बेंच ने मामले की सुनवाई 27 जुलाई तक स्थगित कर दी। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि लिए चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा हाउसिंग बोर्ड को 20.77 एकड़ जमीन सौंपी जा चुकी है। कर्मचारियों के लिए 252 मकानों के निर्माण के लिए 11.795 एकड़ जमीन हाउसिंग बोर्ड को पहले ही दी जा चुकी है। इस स्कीम के लिए बाकी जमीन रिलीज करने का खाका बना लिया गया है और उसे केंद्र के पास मंजूरी के भेजा गया है।
यह है मामला
मामला चंडीगढ़ हाऊसिंग बोर्ड के माध्यम से चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों को हाउसिंग वेलफेयर स्कीम के तहत चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा मकान उपलब्ध करवाने से जुड़ा है। इस स्कीम से पांच हजार से अधिक कर्मचारी जुड़े हुए हैं। लेकिन यह मामला चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के बीच उलझ कर रह गया। प्रशासन ने मकान निर्माण क ा जिम्मा हाउसिंग बोर्ड को सौंपा था। हाउसिंग बोर्ड की ओर से पूरी योजना तैयार करते हुए मकानों के ड्रा निकाले गए थे और चयनित लोगों से राशि भी एकत्रित की गई थी। इसके बाद मामला लटकता चला गया और इस बीच कर्मचारियों का 57 करोड़ रुपया हाउसिंग बोर्ड के पास ही जमा रहा। एक बार तो हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन के बीच टकराव के बाद यह कह दिया गया था कि इस स्कीम को ही रद्द कर दिया जाए।