विज्ञापन के अनुसार स्क्रीनिंग टेस्ट के समय श्रेणीवार पदों के चार गुना आवेदकों को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाना था। इस चयन के दौरान श्रेणी के अनुसार आवेदकों की मेरिट सूची बनाई गई और इसके चलते याची जिसने सामान्य श्रेणी के आवेदक से अधिक अंक प्राप्त किए हैं फिर भी उसे योग्य नहीं माना जा रहा है। ऐसा करना संविधान में दिए समानता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।
याची ने कहा कि वह आरक्षित श्रेणी की उम्मीदवार है और उसने सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से अधिक अंक प्राप्त किए लेकिन उसको स्क्रीनिंग टेस्ट में आयोग द्वारा चयनित नहीं किया गया। आयोग को उन लोगों की विषय ज्ञान परीक्षा आयोजित करनी थी जो स्क्रीनिंग टेस्ट में योग्य थे। हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए पीजीटी गणित की विषय ज्ञान परीक्षा पर रोक लगा दी थी।
अब हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए स्क्रीनिंग टेस्ट के परिणाम को रद्द कर दिया है। साथ ही नए सिरे से नियमों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान सभी को समान अवसर देकर भर्ती को आगे बढ़ाना ही सही तरीका है। अंत में जब नियुक्ति देने का समय आए तब आरक्षण का लाभ देकर अंतिम सूची बनाई जानी चाहिए।