उन्होंने इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है। साथ ही कहा है कि यूएन के समक्ष भी इस मुद्दे को उठाया जाए और तस्करी को रोकने के लिए उनकी यूनेस्को के प्रति प्रतिबद्धता की याद दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि यहां स्थानीय स्तर पर भी हेरिटेज फर्नीचर की चोरी रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए।
कौन हैं जो विदेश ले जाकर बेच रहे चंडीगढ़ की धरोहर
पियरे जेनरे चंडीगढ़ के स्विस-फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए के साथ काम करते थे। इसी कारण ली कार्बूजिए ने चंडीगढ़ में घरों, सड़कों और पार्कों की प्लानिंग से लेकर सरकारी दफ्तरों में रखी जाने वाली कुर्सियों, मेज आदि को लेकर भी यूनिक स्टाइल के डिजाइन की जिम्मेदारी पियरे जेनरे को दी थी।
विदेश में इनके चाहने वाले मुंह मांगे दामों पर फर्नीचर को खरीदते हैं। चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर विदेश पहुंच कैसे रहा है, यह बड़ा सवाल है। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि बड़ी संख्या में शहर का हेरिटेज फर्नीचर विदेश तक कब और कैसे पहुंचा है। कौन लोग हैं, जो चंडीगढ़ के फर्नीचर को विदेश में ले जाकर करोड़ों में बेच रहे हैं।
पीयू से हेरिटेज फर्नीचर की चोरी में यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। इसकी पीयू अपने तरीके से जांच कर रही है। वहीं, हेरिटेज फर्नीचर को लेकर बनाई गई कमेटी भी कड़े निर्णय लेने की तैयारी में है। इसके तहत विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारियां बढ़ाई जाएंगी।
पीयू की ओर से बनाई गई कमेटी ने कुछ माह पहले सभी विभागों को पत्र भेजकर पूछा था कि वह बताएं कि उनके पास कितना हेरिटेज फर्नीचर है। कुछ विभागों ने लिखा था कि उनको पता नहीं है कि हेरिटज फर्नीचर की पहचान कैसे होती है और कुछ ने लिख दिया था कि उनके यहां हेरिटेज फर्नीचर है ही नहीं। सूत्रों का कहना है कि जिन विभागों ने हेरिटेज फर्नीचर न होने की बात लिखी थी, उनमें से कुछ विभागों से फर्नीचर चोरी हुआ है। हाल ही में जिस विभाग से फर्नीचर चोरी हुआ है, वह भी संदेह के दायरे में है।
सूत्रों का कहना है कि जांच कमेटी इसी सप्ताह में सभी तथ्यों की जांच करेगी। कई परतें खुलेंगी। साथ ही अंदरखाने चल रही जांच में उन लोगों का भी पता लग सकता है जो फर्नीचर चोर गिरोह से मिले हुए हैं। एक भी व्यक्ति इस प्रकरण में पीयू को हाथ लगा तो फिर परत दर परत खुलती जाएंगी। पीयू के ब्वॉयज हॉस्टल नंबर पांच से मरम्मत को जा रही करोड़ों की टेबल प्रकरण में भी दो सीनियर कर्मचारी फंस सकते हैं। वह भी जांच के दायरे में हैं।