पीजीआई में देश की न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जन की सर्वश्रेष्ठ फैकल्टी और सर्विस है। यहां पर राजस्थान से लेकर जम्मू तक के मरीज इलाज कराने आते हैं। रोजाना 300-400 मरीजों की ओपीडी होती है।
इनमें अधिकतर मरीज हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड के होते हैं। यदि पीजीआई को छोड़ दिया जाए तो शहर में कहीं भी न्यूरोसर्जन नहीं है। जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 में इसका नामो-निशान नहीं है।
शहर के प्राइवेट हास्पिटलों का भी हाल यही है। मरीजों को इलाज के लिए मोहाली ही जाना पड़ता है। यहां पर कुछ बड़े हास्पिटल है जहां पर न्यूरो से संबंधित बीमारियों का अच्छा इलाज होता है, लेकिन महंगा इतना कि आम आदमी के बस की बात नहीं है।
दूसरी तरफ पीजीआई में इतनी भीड़ है कि वहां पर जल्दी इलाज मिलना मुनासिब नहीं है। ब्रेन स्ट्रोक आने के तीन घंटे में इलाज मिलना बेहद जरूरी है।
क्या होता है ब्रेन अटैक
जब दिमाग की एक नस में अचानक खून पहुंचना बंद हो जाए तो उसे ब्रेन अटैक कहते हैं। दिमाग की कोशिकाओं को रक्त से मिलने वाली ऑक्सीजन की लगातार आवश्यकता होती है। जैसे ही रक्त पहुंचना बंद हो जाता है तो मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
इसलिए जरूरी है न्यूरोसर्जन
लोगों का लाइफ स्टाइल चेंज होने से ब्रेन स्ट्रोक बीमारी काफी तेजी से बढ़ रही है। पहले यह सीनियर सिटीजन में काफी देखी जाती थी। अब पीजीआई में 25-26 साल के युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक संबंधी केस आ रहे हैं। पांच साल में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में 30-40 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
पहले पीजीआई की ओपीडी में 200 मरीज आते थे, लेकिन अब ओपीडी में इनकी संख्या 350 से पार हो गई है। जिस तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ी है, उतनी तेजी से न तो डाक्टर बढ़े और न ही सुविधाएं।
ऐसे रोके ब्रेन स्ट्रोक
तनाव न लें, ध्यान करेंधूम्रपान और शराब के सेवन से बचेंनियमित रूप से व्यायाम करेंभार औसत से अधिक न बढ़ने देंहृदय और मधुमेह के रोगी विशेष सावधानी बरतेंसोडियम का अधिक मात्रा में सेवन न करेंगर्भ निरोधक गोलियों का सेवन न करें।
ब्रेन स्ट्रोक आए तो ये नंबर मिलाएं
पीजीआई ब्रेन स्ट्रोक के गोल्डन टाइम की अहमियत को अच्छी तरह से समझता है। इसीलिए उसने कुछ इमरजेंसी नंबर जारी किए हैं। ब्रेन स्ट्रोक आने पर 8872500500, 9914209697 नंबर पर फोन करने से पीजीआई की ओर से इलाज की तैयारी शुरू कर दी जाती है।
इन मरीजों को प्राथमिकता के तौर पर इलाज उपलब्ध कराया जाता, ताकि कोई देरी न हो। हालांकि इन नंबरों के बारे में ज्यादा लोगों को मालूम नहीं है। इसलिए वे इसका फायदा नहीं उठा पाते।