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पंजाब में बारिश का कहरः खेत में दफन हो गईं किसानों की उम्मीदें, हजारों एकड़ फसल जलमग्न

Wed, 26 Sep 2018 01:29 PM IST
अखिल तलवार, अमर उजाला, बठिंडा (पंजाब)
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टूटी नहर की पटरी
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चार महीने से खून-पसीने से सींचकर अपनी फसल पाल रहे किसानों पर ऐसा आसमानी कहर बरसा कि उनकी सारी उम्मीदें खेत में ही दफन हो गईं। इसी के साथ फसल पकने को लेकर जो सपने संजोए थे, वो भी एक ही पल में टूट गए। शनिवार रात को सोए किसान जब अगली सुबह जागे तो उनका सब कुछ खत्म हो चुका था। रात को नहरें और राजवाहों के किनारे पानी के तेज बहाव के आगे दम तोड़ गए और सारा पानी खेतों में भर गया। 

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कई सौ एकड़ फसल बिलकुल तबाह हो गई। हर जगह एक ही वजह, सिंचाई विभाग ने कभी नहरों और रजवाहों की सफाई ही नहीं करवाई। इसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ेगा। नहरी आफत के साथ-साथ बारिश ने भी कम नुकसान नहीं किया। इस बार धान की बंपर फसल की उम्मीद थी और नरमा भी काफी अच्छा दिखाई दे रहा था। लेकिन सितंबर में आई बेमौसम बरसात ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। धान की फसल खेतों में बिछ गई, नरमे के खेतों में पानी भर गया। दोनों का ही उत्पादन अब गिर जाएगा।

कोटला ब्रांच टूटी, आठ सौ एकड़ फसल तबाह

नहर की मरम्मत करते किसान
गांव जोधपुर पाखर के बीच से गुजरने वाली कोटला ब्रांच नहर लगातार बारिश के बाद शनिवार को पानी के तेज बहाव के आगे पस्त हो गई। किनारे का एक बड़ा हिस्सा तोड़ते हुए पानी बाढ़ की शक्ल में खेतों में भर गया। एक किसान गुरचरन सिंह का घर भी ध्वस्त हो गया। जोधपुर पाखर के साथ के दो और गांव भी पानी की चपेट में आ गए। यहां धान और कपास के करीब आठ सौ एकड़ फसल बर्बाद होने की आशंका है।

 रविवार सुबह करीब साढ़े चार बजे किसी गांव वाले ने तबाही का मंजर देखा तो सबको जगाया। आनन-फानन में गांव वाले बोरियों में मिट्टी भर कर अस्थाई बांध बनाने में जुट गए। प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। सिंचाई विभाग को नहर का पानी रोकने में एक दिन लग गया। सोमवार सुबह साढ़े चार बजे पानी पीछे से रोक कर डायवर्ट किया गया। रविवार का पूरा दिन निकल गया, बांध बन नहीं पा रहा था। फिर जोधपुर पाखर वालों ने आसपास के सभी गांवों में मैसेज भिजवाया। 

वहां गुरद्वारों से अनाउंसमेंट करवाए गए। सोमवार सुबह करीब बीस गांवों के लोग ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर खाली बोरियां, दूध और खाने का सामान लेकर जोधपुर पाखर पहुंच गए। बड़ी तादाद में लोग जुटने के बाद बांध बनाने का काम तेज हुआ। लोगों ने वहीं से मिट्टी बोरियों में भरकर नहर के किनारों पर लगाईं। साथ ही लंगर भी चलता रहा। बठिंडा के डीसी परनीत सोमवार सुबह मौके का मुआयना कर गए, पर कोई मदद नहीं आई। 

राजवाहा टूटा, डूबी फसल

नहर सही करते हुए किसान
सिंचाई विभाग ने एक पोकलेन मशीन भिजवाई, लेकिन उसमें डीजल खुद गांव वालों ने डलवाया। किसान इतने गुस्से में थे कि वे मौके पर पहुंचे सिंचाई विभाग की मानसा डिविजन के एक्सईएन करतार चंद से उलझ पड़े। करतार चंद ने अमर उजाला से बातचीत में माना कि विभाग की तरफ से कोई मैन पावर नहीं दी गई। उनकी दलील थी कि पानी बंद करने से पहले कई तकनीकी पहलू देखने पड़ते हैं, जिनमें समय लगता है। 

जोधपुर पाखर के किसान हरदेव सिंह ने कहा कि नहरी विभाग किसानों का सबसे बड़ा दुश्मन है। जब फसल लगा रहे थे, पानी की जरूरत थी तो पानी दिया नहीं और अब इतना भेज दिया कि सब कुछ तबाह हो गया। इस नहर की कभी भी सफाई नहीं हुई, पूरी सरकंडों से भरी है। यहां कोई बेलदार भी नहीं जो खराब मौसम में नहर पर नजर रख सके। इस बर्बादी के लिए पूरी तरह नहरी विभाग ही जिम्मेदार है।

गांव नवां पिंड और जगा के लोगों के लिए शनिवार की रात कयामत की रात थी। पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही थी। शनिवार रात को पानी के तेज बहाव से राजवाहे का एक हिस्सा टूट गया। धान की करीब दो सौ एकड़ फसल पानी में पूरी तरह डूब गई। इसमें डेढ़ सौ एकड़ फसल नवां पिंड और पचास एकड़ गांव जगा के लोगों की थी।

 खेतों में पानी पूरी तरह भर गया है, जो किसी भी हालत में निकल नहीं सकता। यहां भी सिंचाई विभाग ने रस्म-अदायगी के लिए एक जेसीबी मशीन भेज दी। खाली बोरियां भी लोग लाए और अस्थायी बांध बनाने का काम भी उन्होंने ही किया। जिला प्रशासन या सिंचाई विभाग का एक मुलाजिम तक मौके पर नहीं था। नवां पिंड के लोगों का कहना था कि राजवाहे की कभी सफाई नहीं हुई। जिसके चलते यह स्थित पैदा हुई। हैरानी की बात यह है कि दो साल पहले ही यह राजवाहा पक्का करवाया गया था। जब कच्चा था तो कभी नहीं टूटा, अब टूट गया।

लोगों के लिए मुसीबत बनी लसाड़ा ड्रेन

टूटी नहर की पटरी
गांव जेठूके के लोगों के लिए लसाड़ा ड्रेन मुसीबत बन गई। यहां भी शनिवार रात को ही तेज बारिश के बाद तबाही आई। रविवार सुबह लोगों ने देखा तो उनके खेत पानी में डूबे हुए थे। करीब साढ़े तीन सौ एकड़ में लगी धान और सब्जियों की फसल बिल्कुल बर्बाद हो गई है। गांव निवासी परमजीत सिंह ने कहा कि यह नहर 1962 में बनी थी, उसके बाद से कभी भी इसकी सफाई नहीं हुई। तबाही के बाद यहां भी प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। गांव वालों ने खुद ही जेसीबी मशीन मंगा कर नहर की गंदगी बाहर निकलवाई।

पूर्व सिंचाई मंत्री के हलके में ही बुरा हाल
 गांव जोधपुर पाखर, नवां पिंड और जेठूके बठिंडा जिले के मौड़ विधानसभा हलके में पड़ते हैं। जिसका प्रतिनिधित्व 2012-17 तक जनमेजा सिंह सेखों ने किया था। अकाली-भाजपा कार्यकाल में सेखों लगातार दस साल तक सिंचाई मंत्री रहे। लेकिन पंजाब की बात दूर उनके अपने हलकों में नहरों की कोई देखभाल नहीं हुई। भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के ब्लॉक प्रधान दर्शन सिंह माइसरखाना ने कहा कि अगर नहरों की थोड़ी सी भी सफाई की गई होती तो यह नौबत नहीं आती। सेखों ने कभी अपने हलके की नहरों की सुध ही नहीं ली, अफसर भी आंख बंद कर बैठे रहे, अब भुगतना किसानों को पड़ रहा है।

धान की बंपर फसल की थी उम्मीद
पंजाब में इस बार धान का रकबा पिछले साल के 30.60 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार कुछ कम 30.42 लाख हेक्टेयर था। लेकिन मौसम लगातार साथ रहा और फसल काफी अच्छी थी। इसलिए खेतीबाड़ी विभाग को इस साल बंपर फसल करीब दो सौ लाख टन उत्पादन की उम्मीद थी। पिछले साल उत्पादन 199 लाख टन रहा था। लेकिन बेमौसम बरसात के कारण उत्पादन गिरना तय माना जा रहा है।

बारिश के कारण सूबे भर में बहुत जगह धान की फसल बिछ गई है, खेतों में पानी भर गया है। खेतीबाड़ी माहिरों का कहना है कि जहां भी खेतों से पानी निकल गया, नुकसान कम होगा। पकी फसल इस स्थिति पर दोबारा खड़ी नहीं हो सकती। अगर वह पानी में भीगी रही तो काफी नुकसान होगा। दाने का रंग खराब हो जाएगा, जर्मिनेशन हो जाएगा, नमी की मात्रा बहुत बढ़ जाएगी। 

जिससे फसल बेचने में काफी दिक्कत आएगी। फसल की कंबाइन से कटाई के समय काफी दाने झड़ कर खेत में ही गिर जाएंगे। धान की कटाई में भी देरी होगी। धान की अधिकारिक खरीद एक अक्तूबर से शुरू होनी है। मंडियों में धान की आमद दस अक्तूबर से होने की उम्मीद की जा रही थी, अब लेट हो जाएगी।
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भाकियू ने की मुआवजे की मांग

जलमग्न किसानों की फसल
भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) ने बारिश से हुए फसलों के नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। यूनियन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि धान, कपास, बासमती और सब्जियों का 25 से 100 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। सरकार तुरंत विशेष गिरदावरी करवाए और फसल के पूरे मूल्य के बराबर मुआवजा दे। कई जगह खेत मजदूरों के घर गिरने के कारण हुई मौतों के लिए दस-दस लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।

सीएम ने दिए गिरदावरी के आदेश
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चार दिन से हो रही बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान का जायजा लेने को विशेष गिरदावरी करवाने के आदेश जारी किए हैं। वित्त कमिश्नर राजस्व को निर्देश दिए गए हैं कि पानी का स्तर घटते ही गिरदावरी शुरू करवाने के लिए सभी डिप्टी कमिश्नर को हिदायतें जारी की जाएं। सभी मंत्रियों और विधायकों को भी अपने हलकों में जाकर जमीनी हालात जानने को कहा गया है।
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