पीजीआई में मरीजों की भीड़ से राहत की उम्मीद अब इस बात पर निर्भर है कि संस्थान को यूटी प्रशासन से 50 एकड़ जमीन कब मिलती है? यूटी प्रशासन से पीजीआई को 50 एकड़ जमीन की मंजूरी तो मिल चुकी है, लेकिन इसके एवज में पीजीआई को करीब 1100 करोड़ रुपये जमा कराने होंगे।
पीजीआई ने कहा कि उसके पास इतने रुपये नहीं है। पेशेंट केयर के लिहाज से यूटी प्रशासन को यह जमीन मुफ्त में सौंपनी चाहिए। इस बारे में पीजीआई ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को गृह मंत्रालय से बात करने को कहा है, ताकि जमीन के लिए रुपये माफ हो जाएं। पीजीआई का कहना है कि 50 एकड़ जमीन मिलने पर वहां कई सारी सुविधाएं शुरू की जा सकेंगी। मिसाल के तौर पर स्क्रीनिंग ओपीडी, ट्रामा सेंटर, इमरजेंसी केयर, कैंसर सेंटर व लर्निंग रिर्सोसेज सेंटर। इनके बनने से बहुत सारा पेशेंट का लोड कम हो सकता है।
दरअसल पिछले दिनों यूटी प्रशासक व पंजाब के गवर्नर वीपी सिंह बदनौर ने पीजीआई से पूछा था कि मरीजों की भीड़ को कैसे कम किया जा सकता है। इस संबंध में पीजीआई डायरेक्टर की ओर से एक डिटेल रिपोर्ट गवर्नर को सौंपी गई है। इसमें पीजीआई ने बताया है कि सात साल में पीजीआई में मरीजों का कितना बोझ बढ़ा है। इससे क्या-क्या दिक्कतें आ रही हैं। डिटेल रिपोर्ट में कई अन्य भी सुझाव हैं।
भीड़ कम करने के लिए पीजीआई की ओर से सुझाव
1. सारंगपुर में 50 एकड़ की लैंड जल्द से जल्द से पीजीआई को सौंपी जाए
2. ऊना और फिरोजपुर में सेटेलाइट सेंटर बनाए जा रहे हैं
3. आसपास के प्रदेश हेल्थ सुविधाओं को बढ़ाएं
4. पड़ोसी राज्यों से उन मरीजों को पीजीआई न भेजा जाए, जिनका इलाज वहां संभव हो
5. पड़ोसी राज्यों के स्वास्थ्य अधिकारियों का एक कोर वर्किंग ग्रुप बनाया जाए, जो रेफरल व बैक रेफरल सर्विस को बेहतर बनाए।