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इस तरीके से कम हो सकती है PGI में भीड़, मिले ये सुझाव

Sat, 09 Dec 2017 04:59 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Chandigarh PGI - फोटो : File Photo
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पीजीआई में मरीजों की भीड़ से राहत की उम्मीद अब इस बात पर निर्भर है कि संस्थान को यूटी प्रशासन से 50 एकड़ जमीन कब मिलती है? यूटी प्रशासन से पीजीआई को 50 एकड़ जमीन की मंजूरी तो मिल चुकी है, लेकिन इसके एवज में पीजीआई को करीब 1100 करोड़ रुपये जमा कराने होंगे। 
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पीजीआई ने कहा कि उसके पास इतने रुपये नहीं है। पेशेंट केयर के लिहाज से यूटी प्रशासन को यह जमीन मुफ्त में सौंपनी चाहिए। इस बारे में पीजीआई ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को गृह मंत्रालय से बात करने को कहा है, ताकि जमीन के लिए रुपये माफ हो जाएं। पीजीआई का कहना है कि 50 एकड़ जमीन मिलने पर वहां कई सारी सुविधाएं शुरू की जा सकेंगी। मिसाल के तौर पर स्क्रीनिंग ओपीडी, ट्रामा सेंटर, इमरजेंसी केयर, कैंसर सेंटर व लर्निंग रिर्सोसेज सेंटर। इनके बनने से बहुत सारा पेशेंट का लोड कम हो सकता है।

दरअसल पिछले दिनों यूटी प्रशासक व पंजाब के गवर्नर वीपी सिंह बदनौर ने पीजीआई से पूछा था कि मरीजों की भीड़ को कैसे कम किया जा सकता है। इस संबंध में पीजीआई डायरेक्टर की ओर से एक डिटेल रिपोर्ट गवर्नर को सौंपी गई है। इसमें पीजीआई ने बताया है कि सात साल में पीजीआई में मरीजों का कितना बोझ बढ़ा है। इससे क्या-क्या दिक्कतें आ रही हैं। डिटेल रिपोर्ट में कई अन्य भी सुझाव हैं।
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भीड़ कम करने के लिए पीजीआई की ओर से सुझाव
1. सारंगपुर में 50 एकड़ की लैंड जल्द से जल्द से पीजीआई को सौंपी जाए
2. ऊना और फिरोजपुर में सेटेलाइट सेंटर बनाए जा रहे हैं
3. आसपास के प्रदेश हेल्थ सुविधाओं को बढ़ाएं
4. पड़ोसी राज्यों से उन मरीजों को पीजीआई न भेजा जाए, जिनका इलाज वहां संभव हो
5. पड़ोसी राज्यों के स्वास्थ्य अधिकारियों का एक कोर वर्किंग ग्रुप बनाया जाए, जो रेफरल व बैक रेफरल सर्विस को बेहतर बनाए।
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क्यों बढ़ रही है पीजीआई में भीड़

pgi chandigarh - फोटो : File Photo
क्यों बढ़ रही है पीजीआई में भीड़
दिल्ली के बाद जम्मू-कश्मीर तक  चंडीगढ़ का पीजीआई एक मात्र ऐसा हास्पिटल है, जहां पर एक छत के नीचे सस्ते रेटों पर कई गंभीर बीमारियों का क्वालिटी इलाज और रिसर्च होती है। इस वजह से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों के मरीज पीजीआई में इलाज के लिए आते हैं। दूसरी अहम वजह यह है कि इन राज्यों के सरकारी अस्पताल और मेडिकल कालेज में सुविधाएं इतनी बेहतर नहीं हैं कि वे गंभीर मरीजों का इलाज कर सकें। डाक्टर भी मरीजों को देखते ही रेफर कर देते हैं। तीसरा कारण यह है कि लोग छोटी-छोटी बीमारियों का इलाज कराने पीजीआई पहुंच जाते हैं। इन तीन कारणों से पीजीआई में लगातार मरीजों की भीड़ बढ़ रही है।

दस साल में ट्रामा सेंटर में 50 फीसदी मरीज बढ़े
साल                 मरीजों की संख्या
2007              25989
2008              27229
2009              29526
2010              32334
2011              33336
2012              35381
2013              37103
2014              39126
2015              40580
2016               44579

छह सालों में ओपीडी में 35 प्रतिशत बढ़े मरीज
साल              मरीज
2010            1614423    
2011            1697018
2012            1854163
2013             1936918
2014             2112129
2015             2260301
2016             2418876

अस्पतालों में मरीजों का बोझ बढ़ने से कई तरह की समस्याएं अब सामने आ रही हैं। मरीजों को क्वालिटी इलाज नहीं मिल पा रहा, पार्किंग की समस्या बढ़ी है, इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सारंगपुर में पीजीआई का विस्तार होना है। इससे काफी समस्याएं हल हो सकती हैं। यदि भूमि जल्दी मिलती है तो काम भी जल्दी शुरू होगा। जमीन के पैसे के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को अवगत करा दिया गया है। 11 सौ करोड़ रुपये पीजीआई नहीं दे सकता है। इस बार की गवर्ननिंग बाडी की मीटिंग में ये एजेंडा लेकर जा रहे हैं।
- प्रोफेसर जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई।
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